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“स्कूल नहीं, सोच बदलना है जरूरी” — उर्वशी दत्त बाली ने अभिभावकों से की अपील

@शब्द दूत ब्यूरो (11 फरवरी 2026)

काशीपुर। समाजसेवी एवं डी बाली ग्रुप की डायरेक्टर श्रीमती उर्वशी दत्त बाली ने परीक्षा सत्र के बीच अभिभावकों से महत्वपूर्ण अपील करते हुए कहा है कि बच्चों के कम अंक आने पर स्कूल बदलना समस्या का समाधान नहीं है। समाधान है माता-पिता का बच्चों की पढ़ाई और दिनचर्या पर नियमित ध्यान देना।

उन्होंने कहा कि इस समय कुछ स्कूलों में परीक्षाएं शुरू हो चुकी हैं और कुछ में होने वाली हैं। ऐसे में अभिभावकों को चाहिए कि वे बच्चों पर अतिरिक्त ध्यान दें, न कि परिणाम आने के बाद स्कूल या शिक्षकों को दोष दें। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि एक ही परिवार के दो-तीन बच्चे यदि एक ही स्कूल में पढ़ते हैं, तो किसी के अच्छे अंक आते हैं और किसी के कम। इससे स्पष्ट है कि स्कूल और शिक्षक समान होने के बावजूद परिणाम अलग-अलग होते हैं, जो बच्चों की मेहनत, दिशा और घर के मार्गदर्शन पर निर्भर करता है।

श्रीमती बाली ने कहा कि हर बच्चे के पास दिन के 24 घंटे समान होते हैं। फर्क केवल इस बात का है कि समय का उपयोग किस दिशा में किया जा रहा है। जो बच्चा प्रथम आता है और जो संघर्ष कर रहा है—दोनों को समान समय मिलता है। अंतर केवल अनुशासन, एकाग्रता और सही मार्गदर्शन का है।

उन्होंने अभिभावकों को याद दिलाया कि बच्चा दिन के लगभग 16–17 घंटे घर पर रहता है, जबकि स्कूल और ट्यूशन में सीमित समय ही बिताता है। ऐसे में केवल स्कूल या ट्यूशन के भरोसे बच्चों का भविष्य नहीं छोड़ा जा सकता। माता-पिता को चाहिए कि वे बच्चों की दिनचर्या पर नजर रखें, उन्हें टाइम-टेबल बनाना सिखाएं, नियमित संवाद करें और उनकी मेहनत को समझें, ताकि वे हीन भावना का शिकार न हों।

एकाग्रता बढ़ाने के लिए श्रीमती बाली ने सुझाव दिया कि बच्चे पढ़ाई शुरू करने से पहले 21 बार आंखें बंद कर “ॐ भूर् भुवः स्वः” का जप करें। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि मन को शांत और केंद्रित करने का एक सरल अभ्यास है, जो पढ़ाई में मददगार साबित हो सकता है।

परीक्षा दे रहे विद्यार्थियों को शुभकामनाएं देते हुए उन्होंने कहा कि अच्छे अंक आएं तो प्रसन्नता की बात है, लेकिन यदि अपेक्षा से कम अंक आएं तो निराश होने की आवश्यकता नहीं है। निरंतर मेहनत और अनुशासन से परिणाम अवश्य बदलते हैं।

उन्होंने अंत में कहा कि बच्चों का भविष्य केवल अंकों से नहीं, बल्कि अनुशासन, मेहनत और सही मार्गदर्शन से बनता है। यदि हमें आने वाली पीढ़ी को मजबूत बनाना है, तो सबसे पहले अभिभावकों को अपनी सोच और जिम्मेदारी को सही दिशा देनी होगी।

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