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काशीपुर में  डंपर का कहर: दूध कारोबारी की मौत के बाद भड़का जनाक्रोश, सड़क पर जमीन पर बैठे नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य भड़के अफसरों पर सुनाई खरी खोटी, देखिए वीडियो

@शब्द दूत ब्यूरो (09 फरवरी 2026)

काशीपुर। ओवरलोड डंपरों की बेलगाम रफ्तार ने एक बार फिर सिस्टम की संवेदनहीनता उजागर कर दी। कुंडेश्वरी पुलिस चौकी क्षेत्र में खनन सामग्री से लदे डंपर की चपेट में आकर दूध कारोबारी जयपाल सिंह (60) की दर्दनाक मौत हो गई। यह घटना उस श्रृंखला की ताजा कड़ी है, जिसमें एक हफ्ते के भीतर पांच लोगों की जान जा चुकी है।

ढकिया नंबर-1 शिवनगर निवासी जयपाल सिंह सोमवार सुबह बाइक से अपने बेटे सोनू के घर जा रहे थे। घर से कुछ ही दूरी पर पीछे से आ रहे ओवरलोड डंपर ने उन्हें कुचल दिया। मौके पर ही उनकी मौत हो गई। जयपाल सिंह दूध का कारोबार करते थे। हादसे के बाद इलाके में आक्रोश फैल गया। सूचना पर एसपी स्वप्न किशोर सिंह और कोतवाली प्रभारी हरेंद्र चौधरी भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है, जबकि डंपर चालक फरार है और उसकी तलाश जारी है।

धरने पर बैठे नेता प्रतिपक्ष, अफसरों को दिखाया आईना
कुंडेश्वरी की इस घटना के विरोध में नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य खुद सड़क पर उतर आए और जमीन पर बैठकर धरना दिया। मौके पर मौजूद अधिकारियों पर उनका गुस्सा फूट पड़ा। उन्होंने कड़े शब्दों में कहा—
“सामने आओ… जमीन पर बैठो… मेरे सामने बैठकर आंख नीचे करके बात करो। किससे वार्ता चल रही है? किस बात की वार्ता?”

अफसरशाही पर सीधा हमला बोलते हुए यशपाल आर्य ने कहा—
“क्या आप लोग चाहते हैं कि यहां सब लोग मर जाएं? पैसे के बल पर, पैसे के दम पर क्या किसी की जिंदगी बर्बाद कर दोगे?”
उन्होंने सवाल दागा—
“एक हफ्ते में पांच मौतें हुई हैं। किसी का बाप गया, किसी का भाई, किसी का बेटा, किसी का पति। क्या आप किसी के घर गए? जिनकी वजह से ये मौतें हुईं, उनकी जिम्मेदारी कौन लेगा?”

यशपाल आर्य ने साफ कहा कि सरकारें आती-जाती रहती हैं, लेकिन ओवरलोडिंग को लूट का जरिया नहीं बनने दिया जाएगा। “हम सरकार में भी रहे हैं, विपक्ष में भी हैं, लेकिन जनता की जान से खिलवाड़ किसी कीमत पर बर्दाश्त नहीं,” उन्होंने चेतावनी दी।

सवाल अब भी कायम
अब सवाल सिर्फ एक हादसे का नहीं, पूरे सिस्टम का है। क्या ओवरलोड डंपरों पर सख्त कार्रवाई होगी या लाशों का आंकड़ा यूं ही बढ़ता जाएगा? क्या सरकार जागेगी या सड़कें इसी तरह लोगों की जान लेती रहेंगी?
यह हादसा नहीं, बल्कि प्रशासनिक चुप्पी से पैदा हुई मौत है।

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