@शब्द दूत ब्यूरो (08 फरवरी)
देहरादून में भारतीय सैन्य अकादमी (आईएमए) के निकट स्थित भूमि को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। आरोप है कि आईएमए जैसी संवेदनशील सैन्य स्थापना के आसपास कृषि भूमि के लैंड यूज़ में बदलाव किए बिना प्लॉटिंग और बिक्री की जा रही है, जिससे सुरक्षा और डेमोग्राफिक संतुलन को लेकर चिंता जताई जा रही है। यह मामला शेखुल हिंद एजुकेशन चैरिटेबल ट्रस्ट से जुड़ा बताया जा रहा है, जिसके अध्यक्ष डॉ. महमूद असद मदनी हैं।
प्रारंभिक अनुमति, आपत्ति और न्यायिक निर्देश
जानकारी के अनुसार, नारायण दत्त तिवारी के नेतृत्व वाली तत्कालीन कांग्रेस सरकार के दौरान उक्त ट्रस्ट को आईएमए के पास इस्लामिक शिक्षण संस्थान खोलने की प्रारंभिक अनुमति मिली थी। दावा किया गया कि ट्रस्ट यहां देवबंद दारुल उलूम की तर्ज पर बड़े शिक्षण संस्थान या मुस्लिम विश्वविद्यालय की योजना बना रहा था। इसके लिए ग्राम हरियावाला, धौलास (पछुवा दून परगना, विकासनगर) क्षेत्र में किसानों से लगभग 20 एकड़ कृषि भूमि खरीदी गई।
जब आईएमए प्रबंधन को इस प्रस्ताव की जानकारी हुई, तो उन्होंने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए राज्य सरकार के समक्ष आपत्ति दर्ज कराई। इसके बाद योजना पर रोक लगी। मामला आगे चलकर उत्तराखंड उच्च न्यायालय तक पहुंचा। हाईकोर्ट ने संवेदनशीलता को देखते हुए निर्देश दिए कि उक्त भूमि का लैंड यूज़ चेंज नहीं होगा, यह कृषि भूमि ही रहेगी और यदि बिक्री होती है तो भी कृषि प्रयोजन के रूप में ही होगी। साथ ही बिक्री से प्राप्त धनराशि ट्रस्ट के सामाजिक कार्यों में उपयोग की जाएगी।
शासनादेश और प्रशासनिक पत्राचार
हाईकोर्ट के आदेश (दिनांक 8 जून 2010) के अनुपालन में राज्य सरकार के राजस्व विभाग के अपर सचिव द्वारा 19 जुलाई 2016 को जिलाधिकारी देहरादून को पत्र भेजा गया, जिसमें स्पष्ट किया गया कि शासनादेश के संदर्भ में ट्रस्ट की कृषि भूमि को अकृषि नहीं किया जाएगा।
पावर ऑफ अटॉर्नी और प्लॉटिंग के आरोप
हालिया आरोपों के मुताबिक, ट्रस्ट ने देहरादून निवासी रईस अहमद को पावर ऑफ अटॉर्नी दी, जिसके बाद 20 एकड़ भूमि पर प्लॉटिंग कर बिक्री की जा रही है। बताया जा रहा है कि इस संबंध में 2016 में तत्कालीन ग्राम प्रधान द्वारा जिला प्रशासन को शिकायतें भी दी गई थीं, लेकिन तब कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। अब कुछ नामों पर रजिस्ट्री और दाखिल-खारिज होने की बातें सामने आ रही हैं।
किसानों से खरीदी गई भूमि
दावा है कि इस भूमि को इस्लामिक शिक्षण संस्थान के उद्देश्य से कई स्थानीय किसानों से खरीदा गया था। आरोप लगाने वालों का कहना है कि अब उसी भूमि पर आबादी बसाने की कोशिशें हो रही हैं, जिससे आईएमए के आसपास बसावट और व्यापारिक गतिविधियों पर न्यायालयीय निर्देशों के उल्लंघन की आशंका जताई जा रही है।
डेमोग्राफी को लेकर उठे सवाल
आरोपों में यह भी कहा जा रहा है कि बाहरी राज्यों से आए लोगों द्वारा यहां बसावट की जा रही है। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। प्रशासनिक स्तर पर मामले की जांच की मांग की जा रही है।
आईएमए की आपत्तियां और समाधान की प्रतीक्षा
सूत्रों के अनुसार, आईएमए ने भी समय-समय पर प्रशासन को आपत्तियां दर्ज कराई हैं, लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान सामने नहीं आया है। सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि सैन्य संस्थानों के आसपास भूमि उपयोग और बसावट को लेकर स्पष्ट और सख्त अनुपालन आवश्यक है।
राजनीतिक बयान और प्रतिक्रियाएं
इस बीच, एक वायरल वीडियो में हैदराबाद के विधायक टी. राजा सिंह द्वारा डॉ. महमूद मदनी पर आरोप लगाए गए हैं। वहीं, 2022 के विधानसभा चुनावों के दौरान भी राज्य में मुस्लिम यूनिवर्सिटी का मुद्दा राजनीतिक बहस का केंद्र रहा था।
मुख्यमंत्री का बयान
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा है कि यह मामला एक वीडियो के माध्यम से उनके संज्ञान में आया है। उन्होंने इसे संवेदनशील बताते हुए जिला प्रशासन से रिपोर्ट तलब की है। मुख्यमंत्री के अनुसार, रिपोर्ट आने के बाद आवश्यक कार्रवाई की जाएगी और राज्य की डेमोग्राफी में किसी भी प्रकार के अवैध परिवर्तन को सफल नहीं होने दिया जाएगा।
यह पूरा प्रकरण न्यायिक निर्देशों, प्रशासनिक कार्रवाई और सुरक्षा चिंताओं से जुड़ा है। आरोपों की सत्यता जांच का विषय है, लेकिन आईएमए जैसी संवेदनशील सैन्य संस्था के आसपास भूमि उपयोग से जुड़े किसी भी निर्णय में पारदर्शिता और कानून का सख्त पालन अनिवार्य माना जा रहा है।
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