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मुख्यमंत्री जिन्हें चंद दिनों में ही छोड़नी पड़ गई थी कुर्सी

शब्द दूत डेस्क 

जगदम्बिका पाल साल 1998 में 21 से 23 फरवरी तक यूपी के सीएम रहे थे। तब के राज्यपाल रोमेश भंडारी ने तत्कालीन सीएम कल्याण सिंह को पद से हटाकर जगदम्बिका पाल को मुख्यमंत्री की शपथ दिला दी थी। हालांकि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद 44 घंटों के अंदर ही पाल को कुर्सी छोड़नी पड़ गई थी।

कर्नाटक में साल 2018 में येदियुरप्पा को भी महज 3 दिनों के अंदर ही सीएम पद से इस्तीफा देना पड़ था। येदियुरप्पा ने 17 से 19 मई तक सिर्फ 55 घंटे के बाद ही मुख्यमंत्री पद छोड़ दिय़ा था।

साल 1990 में ओम प्रकाश चौटाला 13 से 17 जुलाई तक हरियाणा के सीएम रहे थे। तब राजनीतिक उठापटक के बाद उन्हें इन 6 दिनों में ही कुर्सी छोड़नी पड़ गई थी।

नीतीश कुमार को साल 2000 में 3 से 10 मार्च तक बिहार का सीएम रहने के बाद पद से इस्तीफा देना पड़ गया था।

येदियुरप्पा साल 2007 में भी बहुत कम दिनों के लिए कर्नाटक के सीएम बने थे। तब 12 से 19 नवंबर तक राज्य का मुख्यमंत्री रहने के बाद उन्हें पद छोड़ना पड़ गया था।

मेघालय के पूर्व सीएम एस सी मारक को साल 1998 में 12 दिनों में ही कुर्सी छोड़नी पड़ गई थी। तब वह 27 फरवरी से लेकर 10 मार्च तक मुख्यमंत्री रहे थे।

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