@शब्द दूत ब्यूरो (22 अक्टूबर 2025)
उधम सिंह नगर। देवभूमि उत्तराखंड के मैदानी इलाकों में अवैध मजारों का जाल तेजी से फैलता जा रहा है। जिले के बाजपुर, गदरपुर, काशीपुर, रुद्रपुर और लालपुर सहित कई क्षेत्रों में सरकारी भूमि पर कब्जे की नियत से बनाए गए अवैध ढांचे प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहे हैं।
काशीपुर से बाजपुर मार्ग पर ही आधा दर्जन से अधिक अवैध मजारें बन चुकी हैं। कुंडा थाना क्षेत्र के पास सड़क किनारे तीन अवैध मजारें देखी जा सकती हैं, जबकि काशीपुर से सुल्तानपुर पट्टी क्षेत्र तक मुख्य मार्गों और ग्रामीण इलाकों में भी ऐसे ढांचे तेजी से खड़े हो रहे हैं। बताया गया है कि सड़कों से दूर ग्रामों के भीतर भी कई अवैध मजारें बनी हैं।
कुछ समय पहले काशीपुर नगरीय और ग्रामीण क्षेत्र में करीब 30 अवैध मजारों के चिन्हित होने की खबर चर्चा में आई थी। इन मजारों को सरकारी भूमि पर कब्जा करने और निजी संपत्तियों में विवाद उत्पन्न करने की नियत से बनाया गया बताया जा रहा है। काशीपुर प्राधिकरण ने एक अवैध मजार पर निर्माण रोकने के लिए नोटिस भी जारी किया था, लेकिन आठ माह बाद भी कार्रवाई नहीं हो सकी।
रुद्रपुर के लालपुर टोल बैरियर के पास भी सरकारी भूमि पर बनी एक अवैध मजार चिन्हित हुई है। यह मामला वर्तमान में वक्फ बोर्ड ट्रिब्यूनल में विचाराधीन है, जबकि यह संरचना हाईवे चौड़ीकरण कार्य में बाधक बनी हुई है। इसी तरह गदरपुर में उद्यान विभाग की भूमि पर भी अवैध मजार बनाए जाने का मामला प्रकाश में आया है, जिस पर प्रशासन ने नोटिस जारी किया है।
सूत्रों के अनुसार देवभूमि में एक ही नाम से कई “फ्रेंचाइजी मजारें” भी सामने आई हैं। जसपुर के जंगलों में “कालू सैय्यद” नाम से बनी मजार का जिक्र गुजरात में भी है। यही नाम उत्तराखंड में कई स्थानों पर मौजूद था, जिनमें से अनेक को धामी सरकार ने बुलडोजर कार्रवाई में ध्वस्त किया था। खटीमा जंगल क्षेत्र में भी एक अवैध मजार की पुष्टि हुई है।
एक सर्वे के अनुसार उत्तराखंड में अब तक लगभग 1000 से अधिक अवैध मजारें चिन्हित की गई थीं। इनमें से 562 अवैध मजारों को धामी सरकार ने ध्वस्त किया है, जबकि शेष पर कार्रवाई अभी जारी है।
सीएम धामी का बयान
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने दोहराया है कि देवभूमि की भूमि पर किसी भी प्रकार का अवैध अतिक्रमण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा, “हमने अब तक करीब 9500 एकड़ सरकारी भूमि को अवैध कब्जों से मुक्त कराया है और साढ़े पांच सौ से अधिक अवैध मजारों को हटवाया है। शेष बची संरचनाओं को भी हटाकर ही यह अभियान पूरा किया जाएगा।”
धामी सरकार का यह अभियान न केवल अवैध कब्जों पर लगाम लगाने का प्रयास है, बल्कि देवभूमि की पहचान और पवित्रता को बनाए रखने की दिशा में एक सख्त प्रशासनिक कदम भी माना जा रहा है।
Shabddoot – शब्द दूत Online News Portal

