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प्रतीकात्मक चित्र

उत्तराखंड जल प्रलय: दून घाटी की नदियों का अतिक्रमणकारियों को कड़ा संदेश

@शब्द दूत ब्यूरो (05 सितंबर 2025)

देहरादून। दून घाटी की बरसाती नदियों ने इस मानसून में अपने रौद्र रूप से शासन-प्रशासन और अतिक्रमणकारियों को चेतावनी दी है। शहर के बीचों-बीच बहने वाली रिस्पना, बिंदाल, तमसा, सोंग, जाखन और आसन जैसी नदियों में आई बाढ़ ने यह साफ कर दिया है कि उनके प्राकृतिक मार्ग को बाधित करने वालों को वे बख्शेंगी नहीं।

पिछले कई दिनों की भारी बारिश के बाद इन नदियों का जलस्तर अचानक बढ़ गया और पानी सीधे किनारे बसी अवैध बस्तियों तक पहुंच गया। बिंदाल पुल, कांवली रोड और रिस्पना पुल से पानी उफान मारता दिखाई दिया, वहीं तमसा नदी टपकेश्वर मंदिर तक पहुंच गई। मालदेवता की सोंग और सहस्त्रधारा की बद्री नदी ने भी आसपास की आबादी को चेतावनी दी कि वे नदी की ओर न बढ़ें। दर्जनों झोपड़ियां, मकान और पालतू जानवर बाढ़ की भेंट चढ़ गए।

विशेषज्ञों का कहना है कि नदियों का प्राकृतिक प्रवाह बाधित होने से आपदा का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। नैनीताल हाई कोर्ट और राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (एनजीटी) पहले भी राज्य सरकार को चेतावनी दे चुके हैं कि नदियों के किनारे हुए अतिक्रमण को हटाया जाए, लेकिन राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी और वोट बैंक की राजनीति के कारण यह कार्य अधूरा ही रह गया।

नदी किनारे बसी मलिन बस्तियां जलप्रवाह को रोक रही हैं और कहा जाता है कि नदियां लगभग 30–35 साल बाद अपने पुराने रास्ते पर लौट आती हैं। इस बार का दृश्य उसी आशंका को मजबूत करता है। रिस्पना का पुल छूता पानी, बिंदाल का उफान और सहस्त्रधारा आईटी पार्क की जलमग्न सड़कें प्रशासन को स्पष्ट संदेश दे रही हैं—हमारे मार्ग को बाधित करोगे, तो हम सब कुछ बहा ले जाएंगे।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने संवेदनशील स्थानों पर नए निर्माण पर रोक लगाने के आदेश दिए हैं। हालांकि, मौजूदा अतिक्रमण हटाने के लिए अब सख्त राजनीतिक इच्छाशक्ति की जरूरत है। अगर समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले दिनों में दून घाटी के लिए यह जल प्रलय और भी भयावह रूप ले सकता है।

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