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उत्तराखंड में आपातकाल के लोकतंत्र सेनानियों को पेंशन देने की तैयारी, कैबिनेट से प्रस्ताव पास, विधानसभा में मिलेगी मंजूरी

@शब्द दूत ब्यूरो (18 अगस्त 2025)

देहरादून। उत्तराखंड की धामी सरकार आपातकाल (1975-77) के दौरान जेल गए लोकतंत्र सेनानियों को पेंशन अथवा हर माह आर्थिक सहायता देने जा रही है। कैबिनेट ने इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है और माना जा रहा है कि अब गैरसैंण में चल रहे विधानसभा सत्र से भी इसे मंजूरी मिल जाएगी।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 25 जून को आपातकाल के पचास वर्ष पूरे होने पर यह घोषणा की थी कि जिन लोगों ने उस दौरान जेल में सजा काटी और यातनाएं सही, उन्हें सरकार आर्थिक सहयोग उपलब्ध कराएगी। इसके बाद गृह मंत्रालय को योजना तैयार करने का निर्देश दिया गया था।

गौरतलब है कि 25 जून 1975 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की सरकार ने आपातकाल लागू किया था, जिसे राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली अहमद ने मंजूरी दी थी। करीब 21 माह तक चले इस दौर में जनसंघ, आरएसएस और विपक्षी दलों के अनेक नेताओं व कार्यकर्ताओं को जेलों में बंद कर यातनाएं दी गई थीं। उत्तराखंड के भी कई लोगों ने जेलों में कठिन परिस्थितियां झेली थीं। हाल ही में केंद्र सरकार ने 25 जून को “संविधान हत्या दिवस” के रूप में मनाने का ऐलान किया था और बीजेपी ने देशभर में कार्यक्रम कर अपने लोकतंत्र सेनानियों को सम्मानित किया था।

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि कांग्रेस ने इमरजेंसी लगाकर हमारे वरिष्ठ कार्यकर्ताओं पर अत्याचार किए, वे महीनों तक जेलों में रहे और संविधान की हत्या की गई। ऐसे लोकतंत्र सेनानियों की चिंता करना हमारी जिम्मेदारी है। माना जा रहा है कि धामी कैबिनेट द्वारा पारित इस प्रस्ताव को विधानसभा से भी मंजूरी मिल जाएगी। हालांकि, सरकार ने अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया है कि हर माह मिलने वाली पेंशन या आर्थिक सहायता की राशि कितनी होगी। उल्लेखनीय है कि बिहार सहित कुछ अन्य राज्यों में भी इस तरह की योजनाएं पहले से लागू हैं।

 

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