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धराली आपदा: 1278 लोग सुरक्षित निकाले गए, 43 लापता ,मुख्यमंत्री के निर्देश पर पीड़ितों को ₹5 लाख अनुग्रह राशि का वितरण शुरू, गढ़वाल मंडलायुक्त ने दी पत्रकारों को जानकारी, देखिए वीडियो

@शब्द दूत ब्यूरो (11 अगस्त 2025)

उत्तरकाशी जनपद के धराली गांव में आई भीषण आपदा के बाद राहत, बचाव और पुनर्वास कार्य तेज गति से जारी हैं। सोमवार को आपदा नियंत्रण कक्ष, उत्तरकाशी में आयोजित मीडिया ब्रीफिंग में गढ़वाल मंडल के आयुक्त  विनय शंकर पांडेय ने अब तक की कार्रवाई और स्थिति की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार प्रभावितों को तुरंत ₹5 लाख की अनुग्रह राशि वितरण की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। साथ ही, एक बेहतर राहत एवं पुनर्वास पैकेज तैयार करने के लिए सचिव राजस्व की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय उच्च स्तरीय समिति गठित की गई है, जो आज ही उत्तरकाशी पहुंचकर क्षति का आकलन और प्रभावितों से वार्ता करेगी।

मंडलायुक्त ने बताया कि आपदा प्रभावित क्षेत्र में युद्धस्तर पर चलाए गए रेस्क्यू अभियान के तहत 1278 लोगों को सुरक्षित निकाल लिया गया है। इनमें फंसे हुए बाहरी पर्यटक, मजदूर और जरूरतमंद स्थानीय लोग शामिल हैं। मलवे में दबे लोगों की खोज शासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है, जिसके लिए एनडीआरएफ की टीम के साथ एक विशेष अधिकारी मौके पर तैनात है। एसडीआरएफ के आईजी भी घटनास्थल पर कैंप कर रहे हैं। इसके अलावा, देहरादून से 10 विशेषज्ञ भूवैज्ञानिकों की टीम भी भेजी गई है। जिलाधिकारी लगातार प्रभावित क्षेत्र में रहकर राहत और सर्च ऑपरेशन की निगरानी कर रहे है।

अब तक प्राप्त जानकारी के अनुसार, आपदा में 43 लोग लापता बताए गए थे। इनमें धराली गांव के एक युवक आकाश पंवार का शव बरामद हो चुका है और उनके परिजनों को आर्थिक सहायता दी गई है। शेष 42 लापता व्यक्तियों में 9 सेना के जवान, धराली गांव के 8 निवासी, पास के क्षेत्रों के 5 लोग, टिहरी जिले का 1, बिहार के 13 और उत्तर प्रदेश के 6 लोग शामिल हैं।

इसके अलावा, 29 नेपाली मजदूरों के लापता होने की सूचना थी, लेकिन मोबाइल नेटवर्क बहाल होने के बाद उनमें से 5 से संपर्क हो गया है। बाकी 24 मजदूरों की तलाश के लिए उनके ठेकेदारों से संपर्क कर विस्तृत जानकारी जुटाई जा रही है। संभावना जताई जा रही है कि केदारनाथ आपदा की तरह इनमें से कई मजदूर सुरक्षित स्थानों पर चले गए हों। अन्य राज्यों के लापता लोगों के परिजनों से भी लगातार संपर्क किया जा रहा है और स्थिति एक-दो दिन में स्पष्ट होने की उम्मीद है।

मंडलायुक्त ने बताया कि हर्षिल में भागीरथी नदी पर बनी झील से पानी की निकासी के प्रयास सिंचाई विभाग और उत्तराखंड जल विद्युत निगम लिमिटेड द्वारा शुरू कर दिए गए हैं, ताकि संभावित खतरे को कम किया जा सके।

आपदा से प्रभावित क्षेत्रों में सड़क संपर्क बहाल करने का कार्य तेजी से जारी है। लिमच्यागाड़ में वैली ब्रिज का निर्माण पूरा कर लिया गया है, जिससे भारी मशीनों को डबरानी तक पहुंचा दिया गया है। अब डबरानी से सोनगाड़ क्षेत्र में क्षतिग्रस्त सड़क की मरम्मत चल रही है और उम्मीद है कि मंगलवार शाम तक यहां सड़क संपर्क बहाल हो जाएगा।
डबरानी से सोनगाड़ के बीच लगभग 5 किमी पैदल मार्ग पर एक हेल्प पोस्ट और मेडिकल कैंप स्थापित किया गया है। एसडीआरएफ और वायरलेस टीम को तैनात किया गया है। खच्चरों के जरिए गैस सिलिंडरों और जरूरी सामान की आपूर्ति शुरू कर दी गई है। जहां सड़क अवरुद्ध है, वहां ट्रांसशिपमेंट के जरिए सामग्री पहुंचाई जा रही है। प्रभावित गांवों में आपदा मित्रों और पंचायत प्रतिनिधियों के जरिए लगातार संपर्क बनाए रखा गया है। मोबाइल नेटवर्क बहाल है और आपदा नियंत्रण कक्ष 24 घंटे सक्रिय है।

मीडिया ब्रीफिंग के दौरान पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) गढ़वाल परिक्षेत्र  राजीव स्वरूप भी उपस्थित रहे। अधिकारियों ने आश्वस्त किया कि राहत, बचाव और पुनर्वास कार्य पूरी तत्परता और प्राथमिकता के साथ संचालित किए जा रहे हैं।

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