@शब्द दूत ब्यूरो (12 जुलाई 2025)
चंपावत। चंपावत और पिथौरागढ़ पुलिस ने एक ऐतिहासिक सफलता हासिल की है। कुमायूं परिक्षेत्र की आईजी श्रीमती रिद्धिम अग्रवाल के निर्देशन में चलाए गए अभियान के तहत शनिवार सुबह नेपाल सीमा के निकट चंपावत जिले में भारी मात्रा में एमडीएमए (MDMA) ड्रग्स की तस्करी नाकाम की गई। यह उत्तराखंड में अब तक की सबसे बड़ी ड्रग बरामदगी मानी जा रही है।
पुलिस टीम ने संयुक्त अभियान में कुल 5 किलो 688 ग्राम एमडीएमए बरामद की है, जिसकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में अनुमानित कीमत 10 करोड़ 23 लाख 84 हजार रुपये आंकी गई है। इस कार्रवाई के दौरान एक 22 वर्षीय महिला ईशा पत्नी राहुल कुमार, निवासी ग्राम पम्पापुर, थाना बनबसा को गिरफ्तार किया गया है, जो नेपाल सीमा के पास शारदा नहर क्षेत्र में एक काले पिट्ठू बैग के साथ संदिग्ध स्थिति में पकड़ी गई।
बरामद बैग की तलाशी में दो पुलिंदे मिले — एक में 3.42 किलो भूरा ढेलेदार पदार्थ और दूसरे में 2.26 किलो सफेद दानेदार एमडीएमए था। गिरफ्तार महिला ने पूछताछ में खुलासा किया कि ये ड्रग्स उसके पति राहुल कुमार और सहयोगी कुनाल कोहली ने पिथौरागढ़ से उसे सौंपे थे। दोनों आरोपी ठाणे, मुंबई में एनडीपीएस एक्ट के तहत वांछित हैं। महिला के अनुसार, वह अपने पति के कहने पर बढ़ती पुलिस सख्ती को देखते हुए ड्रग्स को नहर में फेंकने जा रही थी।
यह कार्रवाई सीओ टनकपुर सुश्री वंदना वर्मा की निगरानी में एसओजी प्रभारी लक्ष्मण सिंह जगवाण, एसओ सुरेंद्र सिंह कोरंगा और 14 सदस्यीय संयुक्त टीम द्वारा अंजाम दी गई। पुलिस ने एनडीपीएस एक्ट की धाराओं 8/21/22 के तहत मामला दर्ज कर आरोपी महिला को गिरफ़्तार कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है।
एमडीएमए एक सिंथेटिक ड्रग है, जिसे ‘मौली’ या ‘एक्स्टसी’ के नाम से भी जाना जाता है। इसका सेवन युवाओं में क्लब कल्चर के तहत बढ़ता जा रहा है, खासकर महानगरों में। हालिया वर्षों में देश में नाइजीरियाई नेटवर्क से जुड़े ऐसे कई गिरोह सक्रिय पाए गए हैं।
इस मामले की पृष्ठभूमि में चंपावत और पिथौरागढ़ पुलिस द्वारा पूर्व में थल क्षेत्र में एक ड्रग फैक्ट्री का भंडाफोड़ किया गया था, जिससे जुड़ा यह नेटवर्क अब और उजागर हो रहा है। पुलिस इस पूरे नेटवर्क के बैकवर्ड व फॉरवर्ड लिंक की जांच कर रही है, जिसमें नेपाल और अंतरराष्ट्रीय संपर्क भी जांच के दायरे में हैं।
चंपावत पुलिस अधीक्षक अजय गणपति और पिथौरागढ़ की एसपी रेखा यादव के नेतृत्व में बीते कुछ समय से ड्रग्स तस्करों के विरुद्ध निरंतर निगरानी, सूचनाएं साझा करने, तकनीकी सर्विलांस और जमीनी खुफिया तंत्र को सक्रिय किया गया था, जिसके सकारात्मक परिणाम इस कार्रवाई के रूप में सामने आए हैं।
आईजी कुमायूं श्रीमती रिद्धिम अग्रवाल ने इस सराहनीय कार्य के लिए पुलिस टीम को ₹20,000 के नगद पुरस्कार से सम्मानित किया है। उन्होंने कहा, “यह उत्तराखंड को नशा मुक्त बनाने की दिशा में हमारी प्रतिबद्धता और पुलिस की सतर्कता का प्रमाण है। इस नेटवर्क को जड़ से खत्म करने तक हमारी कार्रवाई जारी रहेगी।”
वर्ष 2024 में चंपावत पुलिस ने अब तक कुल 4 करोड़ से अधिक मूल्य के मादक पदार्थों की बरामदगी की है और 82 तस्करों की गिरफ्तारी कर 56 से अधिक मुकदमे दर्ज किए हैं।
चंपावत पुलिस ने लोगों से अपील की है कि कोई भी संदिग्ध गतिविधि दिखने पर तुरंत टोल-फ्री नंबर 100/112 या निकटतम थाना/चौकी को सूचित करें। “आपका सहयोग ही उत्तराखंड को नशा मुक्त बना सकता है।”
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