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उत्तराखंड में 537 अवैध मजारों पर चला धामी सरकार का बुलडोजर


@शब्द दूत ब्यूरो (03 जुलाई 2025)

उत्तराखंड में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में चल रहा अवैध अतिक्रमण विरोधी अभियान अब निर्णायक मोड़ पर है। सरकारी और वन भूमि पर बनीं 537 से अधिक अवैध मजारों को चिन्हित कर प्रशासन ने अब तक ध्वस्त कर दिया है। यह कार्रवाई राज्यभर में एक स्पष्ट संदेश दे रही है कि धार्मिक स्थल के नाम पर भूमि पर अवैध कब्जा अब नहीं चलने वाला।

यह अभियान केवल धार्मिक संरचनाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि किसी भी प्रकार के गैर-कानूनी अतिक्रमण को हटाने का उद्देश्य लेकर आगे बढ़ रहा है। लेकिन चूंकि हाल के वर्षों में धार्मिक आस्था की आड़ में वनभूमि, सिंचाई विभाग, और सार्वजनिक स्थलों पर मजारें बनती जा रही थीं, इसलिए सरकार ने इन्हें चिन्हित कर सख्ती से हटाने की प्रक्रिया शुरू की।

मई 2023 से अब तक चले अभियान के दौरान सबसे पहले वन विभाग की भूमि पर बनी संरचनाओं को निशाना बनाया गया। कोर्बेट टाइगर रिज़र्व क्षेत्र में ही नौ ऐसी मजारें मिलीं जो वन कानूनों का खुला उल्लंघन कर बनी थीं। इनमें से कुछ तो 150 साल से भी अधिक पुरानी थीं, लेकिन इनके दस्तावेज या वैधानिक प्रमाण न मिलने के कारण इन्हें हटाया गया।

इसी क्रम में देहरादून स्थित दून अस्पताल परिसर और यहां के प्रतिष्ठित दून स्कूल के भीतर भी अवैध मजारों का निर्माण पाया गया। शिकायतों के बाद प्रशासन ने इन स्थलों से भी मजारों को हटाया और परिसर को स्वच्छ व सार्वजनिक उपयोग के योग्य बनाया।

काशीपुर के कुंडेश्वरी क्षेत्र में सिंचाई विभाग की भूमि पर बनी एक अवैध मजार को खुद अतिक्रमणकर्ताओं ने प्रशासन की कार्रवाई से पहले ही हटा दिया। यह घटना अपने आप में इस बात का प्रमाण है कि शासन की सख्ती का असर अब जमीन पर दिख रहा है।

वन विभाग के अनुसार केवल 2023 के भीतर 330 से अधिक अवैध धार्मिक संरचनाएं चिन्हित कर हटाई गईं, जिनमें से अधिकांश मजारें थीं। इससे लगभग 91 हेक्टेयर वनभूमि को मुक्त कराया गया, जो पर्यावरणीय संतुलन के लिहाज़ से भी महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इन कार्रवाइयों को धर्म विरोधी बताने वाले आलोचकों को स्पष्ट संदेश दिया है कि “यह कार्रवाई अवैध निर्माणों के खिलाफ है, धर्म के खिलाफ नहीं।” उन्होंने कहा कि “उत्तराखंड को अराजकता मुक्त बनाना और प्रत्येक नागरिक को समान अधिकार दिलाना सरकार का कर्तव्य है।”

सरकार ने जिलों को निर्देश दिए हैं कि वे सभी सरकारी, वन और सार्वजनिक भूमि की मैपिंग कराकर किसी भी प्रकार की अवैध धार्मिक संरचना को चिन्हित करें। स्थानीय प्रशासन को रिपोर्ट प्रस्तुत करने और उचित वैधानिक प्रक्रिया के तहत विध्वंस करने का अधिकार दिया गया है।

जहां एक ओर यह कार्रवाई शासन-प्रशासन की इच्छाशक्ति को दर्शाती है, वहीं यह समाज में यह भी स्पष्ट करती है कि आस्था का स्थान मन में होता है, न कि कब्जाई गई जमीन पर। अवैध चिन्हित हुई मजारों को हटाने की कार्रवाईयां दर्शाती हैं कि सरकार बिना भेदभाव के, केवल वैधानिकता के आधार पर काम कर रही है।

यह पूरी कार्रवाई उत्तराखंड राज्य को एक व्यवस्थित, वैधानिक और पर्यावरणीय रूप से संतुलित दिशा में ले जाने का प्रयास है।

 

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