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रिखणीखाल करंट हादसा: संविदा कर्मी की मौत पर सख्त हुए मुख्यमंत्री, एक्स ईएन, एसडीओ व जेई तत्काल निलंबित

@शब्द दूत ब्यूरो (19 जून 2025)

पौड़ी/देहरादून। पौड़ी जनपद के रिखणीखाल ब्लॉक अंतर्गत वड्डाखाल क्षेत्र में बुधवार को विद्युत लाइन पर कार्य करते समय संविदा लाइनमैन की करंट लगने से हुई दर्दनाक मौत ने पूरे प्रशासनिक महकमे को झकझोर दिया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस घटना को अत्यंत गंभीरता से लेते हुए संबंधित तीन अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने के निर्देश दिए हैं।

मुख्यमंत्री के आदेश पर विद्युत उपखंड अधिकारी चंद्रमोहन, अवर अभियंता शुभम कुमार और अधिशासी अभियंता विनीत कुमार सक्सेना को निलंबित कर दिया गया है। यह कार्रवाई सुरक्षा मानकों की अनदेखी और कार्यस्थल पर लापरवाही बरतने की वजह से की गई है। सरकार ने साफ कर दिया है कि कर्मियों की सुरक्षा सर्वोपरि है और इस प्रकार की लापरवाही को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि राज्य सरकार हर कर्मचारी के जीवन और सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देती है। उन्होंने निर्देश दिया है कि विद्युत कार्यों के दौरान सभी आवश्यक सुरक्षात्मक उपकरण जैसे हेलमेट, ग्लव्स, सेफ्टी बेल्ट, इन्सुलेटेड औजार आदि अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराए जाएं और फील्ड में कार्यरत कर्मियों को इनका प्रशिक्षण भी दिया जाए।

मुख्यमंत्री ने इस बात पर भी चिंता जताई कि यदि ऐसी घटनाएं सुरक्षा मानकों की अनदेखी से हो रही हैं, तो यह विभागीय स्तर पर बड़ी चूक का संकेत है। उन्होंने उत्तराखंड पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (UPCL) के उच्चाधिकारियों से इस संदर्भ में स्पष्ट रिपोर्ट और स्पष्टीकरण तलब किया है।

मुख्यमंत्री ने UPCL प्रशासन को निर्देशित किया है कि यह सुनिश्चित किया जाए कि सभी विद्युत उपकेंद्रों, उपखंडों और फील्ड स्तर पर कार्यरत कर्मचारियों तक सुरक्षात्मक उपकरणों की समुचित और समयबद्ध आपूर्ति हो रही है या नहीं। साथ ही यह भी जाँच की जाएगी कि क्या पूर्व में ऐसे किसी लापरवाही के मामलों को नजरअंदाज किया गया।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि दोषी अधिकारियों या कर्मचारियों के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी, जिससे भविष्य में ऐसी दुखद घटनाएं रोकी जा सकें।

इस घटना से स्थानीय लोगों में रोष है और क्षेत्र में कार्यरत संविदा कर्मचारियों ने भी अपनी सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने मांग की है कि कार्य के दौरान सुरक्षा उपायों को अनिवार्य किया जाए और उन्हें नियमित प्रशिक्षण भी दिया जाए।

यह घटना केवल एक लापरवाही नहीं, बल्कि एक चेतावनी है कि कार्यस्थलों पर सुरक्षा अब प्राथमिकता नहीं बल्कि अनिवार्यता होनी चाहिए। मुख्यमंत्री की त्वरित कार्रवाई ने एक सख्त संदेश दिया है — अब कोई कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

 

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