डिजिटल ट्रैकिंग और हेल्पलाइन नंबर की व्यवस्था
मुख्यमंत्री ने कहा कि यात्रा मार्ग पर दूरसंचार नेटवर्क की बेहतर व्यवस्था होनी चाहिए। डिजीटल ट्रैकिंग सिस्टम की भी स्थापना की जाए ताकि हर श्रद्धालु की गतिविधि पर नजर रखी जा सके। श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए हेल्पलाइन नंबर भी जारी किया जाएगा।
स्वास्थ्य, स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण
- यात्रा मार्ग और पड़ावों पर मेडिकल कैंप और डॉक्टरों की पर्याप्त व्यवस्था हो।
- हेली एम्बुलेंस की सुविधा रहे ताकि किसी भी आपात स्थिति में त्वरित सहायता मिल सके।
- यात्रा के दौरान स्वच्छता, टॉयलेट, भोजन और स्नानघर की बेहतर व्यवस्था की जाए।
- पेयजल और टैंट की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की जाए।
- वन क्षेत्रों में पर्यावरण संरक्षण का विशेष ध्यान रखा जाए।
प्रचार-प्रसार और सांस्कृतिक दस्तावेज़ीकरण
पर्यटन विभाग को निर्देश दिये गए हैं कि यात्रा के प्रत्येक पड़ाव का प्रचार-प्रसार बड़े स्तर पर किया जाए। साथ ही लोकगीतों और लोककथाओं का अभिलेखीकरण भी किया जाए ताकि संस्कृति को संरक्षित किया जा सके।
भीड़ प्रबंधन और यातायात व्यवस्था
मुख्यमंत्री ने कहा कि यात्रा के दौरान भीड़ नियंत्रण एवं ट्रैफिक व्यवस्था सुदृढ़ होनी चाहिए। पार्किंग स्थलों की योजना बनाई जाए और प्रवेश व निकास मार्गों की स्पष्ट व्यवस्था हो।
नियमित समीक्षा और जन भागीदारी
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिये कि:
- मुख्य सचिव हर माह तैयारियों की समीक्षा करें।
- मंडलायुक्त (गढ़वाल/कुमाऊँ) प्रत्येक सप्ताह समीक्षा करें।
- जनप्रतिनिधि, समिति सदस्य और स्थानीय लोग भी अपने सुझाव दें।
बैठक में राज्यसभा सांसद महेन्द्र भट्ट, विधायकगण बंशीधर भगत, अनिल नौटियाल, भूपाल राम टम्टा, सुरेश गड़िया, पार्वती दास एवं डॉ. मोहन सिंह बिष्ट के साथ-साथ प्रशासनिक अधिकारी मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन, डीजीपी दीपम सेठ, गढ़वाल आयुक्त विनय शंकर पांडेय व अन्य वरिष्ठ अधिकारी शामिल रहे।
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