@शब्द दूत ब्यूरो (30 मई 2025)
कोटद्वार। लगभग तीन वर्ष पहले 18 सितंबर 2022 को यमकेश्वर में युवती अंकिता भंडारी की हत्या कर दी गई थी। उसके शव को कैनाल में फेंक दिया गया था। आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद कैनाल से शव बरामद किया गया।
आज इस बहुचर्चित हत्याकांड में कोटद्वार की अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत ने अपना फैसला सुनाया। हत्या, साक्ष्य छुपाने समेत चारों आरोपों में तीनों आरोपियों को दोषी करार दिया है। वहीं, अंकिता के परिजनों ने इस मामले में आरोपियों की फांसी की मांग की है।
जांच कैसे हुई?
अंकिता भंडारी हत्याकांड में एसआईटी की ओर से जांच के बाद 500 पेज की चार्जशीट कोर्ट में फाइल की थी। इसमें 97 गवाहों को नामित किया गया था। अभियोजन पक्ष की ओर से इसमें से 47 गवाहों को कोर्ट में पेश किया गया। कोर्ट ने सभी गवाहों के बयान और सबूतों के आधार पर सुनवाई पूरी की। मामले में फैसले के लिए आज शुक्रवार की तिथि तय की गई। एडीजे रीना नेगी ने अंकिता भंडारी हत्याकांड के आरोपियों पुलकित आर्या, सौरभ भास्कर और अंकित गुप्ता को दोषी करार दिया गया है। अब सजा के बिंदु पर बहस शुरू हो गई है। जल्द ही सजा का ऐलान होगा।
अंकिता भंडारी हत्याकांड में एसआईटी की चार्जशीट, साक्ष्य और गवाहों के बयान के आधार पर एडीजे रीना नेगी ने पुलकित आर्या, सौरभ भास्कर और अंकित गुप्ता को दोषी करार दिया है। मुख्य आरोपी पुलकित आर्य पर आईपीसी की धारा 302 (हत्या), 201 (साक्ष्य छुपाना), 354ए (छेड़खानी व लज्जा भंग) और अनैतिक देह व्यापार अधिनियम के तहत आरोप तय किए गए थे। अंकिता की हत्या के बाद आरोपियों को 24 घंटे के अंदर जेल भेजा गया और अभी तक वह सलाखों के पीछे हैं।
उत्तराखण्ड के इस बहुचर्चित अंकिता भंडारी हत्या मामले में जांच के लिए राज्य सरकार ने एस आई टी का गठन किया था। आरोपियों पर गैंगस्टर अधिनियम के तहत भी केस दर्ज हुआ।
राज्य की धामी सरकार ने अंकिता भंडारी के परिवार को ₹25 लाख की आर्थिक मदद भी दी। अंकिता हत्याकांड मामले में 500 पन्नों की चार्ज शीट हुई तैयार 100 गवाहों के बयान भी किए गए शामिल।
जांच के दौरान धामी सरकार ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए अंकिता के परिजनों की मांग पर 3 बार सरकारी वकील बदले। यही नहीं धामी सरकार ने अंकिता के भाई और उसके पिता को सरकारी नौकरी भी दी।
इस मामले में एक वीआईपी का जिक्र खूब हुआ। जिस पर विपक्षी दल और अदालत में कोई चर्चा किसी ओर से नही हुई। अलबत्ता अदालत के बाहर वीआईपी का मुद्दा खूब उछाला गया। माना जाता है कि यह मुद्दा केवल राजनीतिक फायदे के लिए जनता को गुमराह करने के लिए उछाला गया था।
कोर्ट में सरकारी वकील द्वारा की गई सख्त पैरवी की वजह से आरोपियों द्वारा दी गई जमानत अर्जी हर बार हुई खारिज। जो सरकार ने किया है प्रकरण में जल्दी निर्णय आना,अपराधियों को जमानत न मिलना,परिजनों के मुताबिक अभियोजन अधिकारी दिया जाना,सुप्रीम कोर्ट द्वारा जाँच को संतोषजनक पाया जाना ये कुछ ऐसे मुद्दे हैं जिनसे यह माना जा रहा है कि इस घृणित हत्याकांड को लेकर राज्य की धामी सरकार राजनीति से हटकर इसे एक आपराधिक कृत्य की दृष्टि से मानकर दोषियों को दंडित किये जाने की नीति पर चल रही थी।
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