@शब्द दूत ब्यूरो (13 मई 2025)
काशीपुर। चुनाव में जीत के बाद अक्सर जनप्रतिनिधि आम जनता के पास पांच साल बाद आता है। दरअसल नेताओं को लेकर यही कहा जाता है। लेकिन काशीपुर का मेयर बनने के बाद दीपक बाली ने इस कहावत को ही बदल डाला है।
ये बात महापौर बनने के बाद दीपक बाली की कार्यशैली से आप समझ सकते हैं। निगम कार्यालय के जिस आफिस में दीपक बाली बैठते हैं वहां आपको आम जनता अपनी फरियाद लेकर जाते दिखाई देती है। हालांकि आम जनता पहले भी अपनी फरियाद लेकर नगर निगम कार्यालय पहुंचती थी लेकिन सीधे मेयर उनकी बात सुने ऐसा कम ही देखने को मिलता था। अब स्थिति इसके ठीक उलट है। प्रतिदिन 11 बजे के आसपास शहर में होने के दौरान दीपक बाली अपने कार्यालय पहुंचते हैं और सबसे पहला काम उनका आम जनता की समस्याओं से रुबरु होना होता है। हर व्यक्ति की समस्या और शिकायत को वह बड़े धैर्य से सुनते हैं और उसका हरसंभव समाधान का त्वरित निर्णय लेते हैं।
कई बार कुछ लोग अपनी शिकायत या समस्या को उत्तेजित होकर दीपक बाली के समक्ष रखते हैं। तब ऐसा लगता है कि महापौर दीपक बाली असहज हो जायेंगे लेकिन नहीं दीपक बाली बड़े आराम से शिकायतकर्ता के उत्तेजक शब्दों का जबाब सधे हुए ढंग से देकर उनके आक्रोश को मौके पर ही शांत कर देते हैं। एकाएक जो व्यक्ति आक्रोश जता रहा होता है वह सहज होकर अपनी बात रखता है। ऐसा अनेक बार हुआ है लेकिन दीपक बाली इन सब हालातों से निपटना भली भांति जानते हैं।
उनके कार्यालय में रोज ही लोग समस्याओं की सूची लेकर आते हैं। ख़ास बात यह है कि समस्याओं के निदान को लेकर महापौर दीपक बाली हर वार्ड के प्रति सकारात्मक रुख रखते हैं। उनकी यही सोच उनकी लोकप्रियता को बढ़ा रही है। उनके कार्यालय में ज्ञापन लेकर आने वाले लोग इसी बात से खुश हो जाते हैं कि महापौर के सामने वह सीधे अपनी समस्या रख रहे हैं और महापौर बिना किसी बिचौलिए के उनकी बात सुन रहे हैं।
Shabddoot – शब्द दूत Online News Portal