@शब्द दूत ब्यूरो (29 जनवरी 2025)
काशीपुर। जिले के तीन पत्रकारों के विरुद्ध रंगदारी के मुकदमे को रद्द करने की मांग को लेकर यहां पत्रकार संगठनों ने नाराजगी जताते हुए उपजिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री को एक ज्ञापन भेजा।
उपजिलाधिकारी को दिये गये ज्ञापन में श्रमजीवी पत्रकार संगठन ने कहा कि उत्तराखंड में 25 जनवरी को निकाय चुनाव की मतगणना संपन्न हुई। इससे पूर्व चुनाव प्रचार के दौरान विपक्षी कांग्रेस पार्टी ने इलेक्ट्रॉनिक प्रीपेड मीटर का मुद्दा उठाया था। कांग्रेस का कहना था कि 810 करोड़ रुपए में हुए इस ठेके में अडानी की कंपनी को कुमाऊं मंडल में सात लाख मीटर लगने हैं। जिसके बाद गरीबों पर बिजली के बिल की मार पड़ेगी।
प्रचार के दौरान कांग्रेस ने कहा था कि यह मीटर स्थानीय गोदामों में आ चुके हैं और निकाय चुनाव के बाद लोगों के घरों में जबरिया लगाए जाएंगे। इसके वीडियो साक्ष्य भी कांग्रेस ने एक प्रेस वार्ता कर उपलब्ध कराए थे। इसके बाद शहर के कुछ पत्रकारों ने इस मुद्दे की असलियत पता करने को 20 जनवरी को अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से उस गोदाम का लाइव प्रसारण किया था।
कांग्रेस के आरोपों की सच्चाई सामने आते ही उन पत्रकारों पर दबाव बनाने के साथ उन्हें धमकियां दी जाने लगी। यह भी प्रयास किया गया कि उन पर मुकदमे दर्ज हों।
25 जनवरी की रात्रि मतगणना की शाम को शहर के वरिष्ठ पत्रकार राजीव चावला, आकाश आहुजा, भूपेश छिम्वाल के खिलाफ पांच लाख रंगदारी मांगने सहित कई धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है, जबकि वास्तविकता यह है कि तीनों पत्रकारों ने अपने दायित्व का निर्वहन करते हुए सत्यता को सामने लाने का प्रयास किया। वहीं लाइव प्रसारण में कभी भी रंगदारी नहीं मांगी जाती है। यहां तक कि शिकायतकर्ता ने अभी तक रंगदारी मांगने के कोई भी साक्ष्य पुलिस को नहीं दिए और पुलिस ने बिना जांच किए मुकदमा दर्ज कर लिया। इससे साफ होता है कि लोकतंत्र के चौथे स्तंभ की स्वतंत्र एवं स्वच्छ पत्रकारिता को दबाने की कोशिश है। जिसे बर्दाश्त नहीं किया जाएंगा। यदि पुलिस प्रशासन ने तीनों पत्रकारों की गिरफ्तारी की, तो प्रदेश श्रमजीवी पत्रकार संगठन सहित सभी पत्रकार संगठनों का समर्थन लेकर गिरफ्तारियां दी जाएंगी। पत्रकार संगठन मांग करता है कि दर्ज मुकदमा जल्द रद्द किया जाए।
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