@शब्द दूत ब्यूरो (22 दिसंबर 2024)
काशीपुर । शहर में इन दिनों मेयर के दावेदारों की फौज खड़ी हो गई है। विभिन्न राजनीतिक दलों से नये नये दावेदार रोज सामने आ रहे हैं। लेकिन सबसे हास्यास्पद बात तो यह है कुछ दावेदार तो ऐसे सामने आ रहे हैं जिनका नाम ही राजनीति में इससे पहले कभी किसी ने नहीं सुना होगा और न कभी शहर की जनता ने उन्हें देखा होगा। अब जनता यानी मतदाता की तो छोड़िये जिस राजनीतिक दल से वह दावेदारी जता रहे हैं उस दल के नेता या कार्यकर्ताओं तक ने उनका नाम पहली बार सुना होगा।
चर्चित नाम तो समझ में आते हैं पर बरसाती मेंढक की तर्ज पर खुद को सोशल मीडिया पर दावेदार के रूप में प्रचारित करने वाले इन नेताओं की बुद्धि पर तरस आता है। वहीं एक तरह से उनकी दावेदारी मतदाताओं को नासमझ साबित कर रही है। एकाएक सोशल मीडिया पर अपना नाम प्रचारित कर अपनी ही पार्टी के लिए एक तरह से यह मजाक करने जैसा है। मेयर का पद है ये जनाब जिसकी जिम्मेदारी क्या होती है ये वह खुद नहीं जानते होंगे।
कुकुरमुत्तों की तरह उगने वाले इन दावेदारों की हकीकत जनता अच्छी तरह जानती है। ये सच है कि लोकतंत्र में चुनाव लड़ना हर नागरिक का अपना अधिकार है। उसे चुनौती नहीं दी जा सकती। लेकिन बिना वजूद के नेता इस बात को कहां समझते हैं।
अब बात करते हैं पार्टी संगठन की चाहे कोई भी पार्टी हो। संगठन पर पकड़ बनाये हुये नेता का कोई रिश्तेदार जब खुद को दावेदार कहता है तो इसका सीधा सा मतलब है कि वर्षों तक पार्टी की सेवा कर रहे कार्यकर्ताओं और नेताओं की कोई वकत नहीं रह गई है। थोपे हुये उम्मीदवार अंततः पार्टी के लिए घातक सिद्ध होते हैं। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के नाम पर दावेदारी करने वाले इन नेताओं को समझना चाहिए कि वोट जिस जनता ने देना है उस पर उनकी कितनी पकड़ है? जो दावेदार पार्टी के वरिष्ठ नेता के नाम पर जीत की संभावना मान बैठे हैं तो इसका अर्थ यह है कि वह जिस जनता के मतों से चुने जायेंगे उस जनता के प्रति उनकी जबाबदेही तो होगी नहीं हां, पार्टी और पार्टी के नेता के प्रति उनकी जबाबदेही जरूर बनती है। ऐसे में जनता से किये गये वादों और आश्वासनों का कोई अर्थ नहीं है।
काशीपुर में आज कमोबेश यही स्थिति है कि दावेदार ही दावेदार हैं। यहां हम बात कर रहे हैं उन दावेदारों की जो अचानक से उभर कर सामने आ रहे हैं। विभिन्न राजनीतिक दलों के नामचीन चेहरे सामने आना अलग बात है लेकिन ये कुकुरमुत्ता प्रजाति के दावेदार आखिर क्या चाहते हैं यह समझना होगा।
(गंभीर और उपयुक्त दावेदार स्वयं को इस लेख से ना जोड़ें)
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