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महाराष्ट्र: आखिर शिवसेना को अब क्या चाहिए, फिफ्टी फिफ्टी का खेल शुरू, छोटा भाई अब बराबर का हो गया

 

शब्द दूत ब्यूरो

मुम्बई। आप अगर कौन बनेगा करोड़पति देखते हैं तो आपको पता होगा कि उसमें एक लाइफ लाइन होती है फिफ्टी फिफ्टी जिसे प्रतियोगी चुनता है। महाराष्ट्र में चुनाव नतीजों के बाद भाजपा और शिवसेना में कौन बनेगा मुख्यमंत्री को लेकर यही चल रहा है। 

महाराष्ट्र में बीजेपी और शिवसेना में बड़ा भाई कौन है, काफी समय में ये चर्चा अक्सर होती रही है। चुनाव नतीजे आने के बाद शिव सेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने साफ़ कर दिया कि बड़ा भाई, छोटा भाई अब नहीं चलेगा, दोनों बराबर के पार्टनर हैं।

शिव सेना ने अपने मुखपत्र ‘सामना’ के सम्पादकीय में लिखा है कि चुनाव परिणाम संकेत दे रहे हैं कि जनता अब सत्ता में बैठे लोगों का ‘अहंकार’ बर्दाश्त नहीं करेगी। जानकार मानते हैं कि शिव सेना का ये संदेश अपने बड़े भाई यानी भारतीय जनता पार्टी की तरफ़ इशारा है।

नतीजों के बाद शिव सेना ने भारतीय जनता पार्टी पर दबाव बढ़ाना शुरू कर दिया है। अब शिव सेना सत्ता में 50:50 भागीदारी के फ़ॉर्मूले पर ज़िद पकड़ चुकी है। इसका एक मतलब ये है कि आधे कार्यकाल तक भारतीय जनता पार्टी का मुख्यमंत्री हो और आधे कार्यकाल के लिए शिव सेना का।

सवाल ये है कि अगर सब कुछ ठीक है तो गठबंधन को पूर्ण बहुमत मिलने के बाद भी फडणवीस जीते हुए निर्दलीय उम्मीदवारों से संपर्क की बात क्यों कर रहे हैं।

स्पष्ट है कि गठबंधन को पूर्ण बहुमत मिलने के बावजूद अगर भारतीय जनता पार्टी निर्दलीय उम्मीदवारों से संपर्क में है तो कुछ तो गड़बड़ है।

जानकारों का मानना है कि पूर्ण बहुमत मिलने के बाद राज्यपाल से मिलना चाहिए न कि निर्दलीय विधायकों से। ये संकेत हैं कि सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। वैसे भी भारतीय जनता पार्टी की जीत के नगाड़े मुंबई में तो खामोश ही रहे जबकि शिव सेना ने ठाकरे परिवार के राजकुमार माने जाने वाले आदित्य ठाकरे की जीत का जमकर जश्न मनाया।

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