@शब्द दूत ब्यूरो (09 अप्रैल, 2024)
बनबसा के धस्माना अस्पताल के फार्मासिस्ट विजयपाल गंगवार और नर्स निशा हत्याकांड में 10 साल बाद फैसला आया है। अस्पताल के संचालक आशीष धस्माना और ड्राइवर इदरीस अहमद को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है। विजय और निशा के परिजन 10 साल से न्याय की आस लगाए बैठे थे। यह मामला सितंबर 2014 में खूब चर्चित हुआ था। चर्चा इसलिए क्योंकि हत्यारों ने बेरहमी और योजनाबद्ध ढंग से ऐसी जान ली जिसे सुनकर हर किसी की रूह कांप गई थी।
इंदिरा नगर इज्जतनगर बरेली निवासी निशा और न्यू सिद्धार्थनगर प्रेमनगर बरेली निवासी विजय बनबसा के धस्माना में साथ काम करते थे। उन्हें कभी आभास नहीं था कि जिस अस्पताल में वह सेवा दे रहे हैं वहां का संचालक इतना क्रूर हो जाएगा कि उन्हें जान तक गंवानी पड़ेगी।
जब धस्माना पकड़ा गया तो उसने अस्पताल की बदनामी के पीछे एक डॉक्टर, निशा और विजयपाल को जिम्मेदार ठहराया था। वह डॉक्टर को अपने अस्पताल चौपट होने का कारण मानता था। इदरीस ने अपने पैंटल फार्म हाउस में दोनों की हत्या की फिर शवों को बनबसा से करीब 33 किलोमीटर दूर नानकसागर डैम के किनारे फेंका था। इतना ही नहीं सिर नानकसागर से छह किमी दूर खकरा नाले में फेंके गए थे।
छह तारीख को आशीष धस्माना की लोकेशन बांध के पास मिली। सात को फिर उसकी लोकेशन वहीं मिली। आठ को भी वह वहीं घूमता रहा। चूंकि वह आदतन अपराधी नहीं था इसलिए अपराध बोध से परेशान होकर टूट गया। पुलिस की पूछताछ में उसने पूरी बात सामने रख दी।
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