@शब्द दूत ब्यूरो (18 मार्च, 2024)
उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर के रामपुर तिराहा गोलीकांड मामले में सीबीआई बनाम मिलाप सिंह की पत्रावली में अपर जिला एवम सत्र न्यायालय संख्या के पीठासीन अधिकारी शक्ति सिंह ने सुनवाई के बाद अपना फैसला सुनाया।
इस मामले में पीएसी के सिपाही मिलाप सिंह और वीरेंद्र प्रताप पर मुकदमा चल रहा था। दोनों अभियुक्तों पर पीड़िता के साथ छेड़छाड़ और दुष्कर्म का मुकदमा चल रहा था। 25 जनवरी 1995 को सीबीआई ने पुलिसकर्मियों के खिलाफ मुकदमें दर्ज किए थे।
अपर जिला एवम सत्र न्यायालय संख्या सात के पीठासीन अधिकारी शक्ति सिंह ने दोनों अभियुक्तों मिलाप सिंह और वीरेंद्र प्रताप को पीड़िता के साथ छेड़छाड़ और दुष्कर्म का दोष सिद्ध पाया था।
अपर जिला एवं सत्र न्यायालय संख्या-7 के पीठासीन अधिकारी शक्ति सिंह ने सुनवाई की और दोनों दोषी सिपाहियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। इसके अलावा दोषियों पर 40 हजार रुपए अर्थदंड भी लगाया है।
यह घटना एक अक्टूबर 1994 की रात की है, जब अलग उत्तराखण्ड राज्य की मांग को लेकर आंदोलनकारी देहरादून से नई दिल्ली जा रहे थे। देर रात मुजफ्फरनगर के रामपुर तिराहे में आंदोलनकारियों की बसों को रोक लिया गया था। और जबरदस्त फायरिंग में सात आंदोलनकारी शहीद हो गए थे।
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