हल्द्वानी। बैंकों से कर्ज लेकर लोग रकम का चुकाने में लापरवाही कर रहे हैं। वसूली नोटिस (आरसी) जारी होने के बावजूद कर्जदार गंभीर नहीं हैं। प्रदेश में कई डिफाल्टरों की आरसी कटे एक से पांच वर्ष या अधिक समय भी हो चुका है। रिमाइंडर भेजने के बाद भी बकाया वसूली में वित्तीय संस्थानों के पसीने छूट रहे हैं।
बैंकों से लिया कर्ज दबाने वालों में नैनीताल जिले के लोगों की संख्या सबसे ज्यादा है। उत्तराखंड राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति की हाल में हुई 37वीं बैठक के आंकड़ों से इसकी पुष्टि हुई है। रिपोर्ट के अनुसार चालू वित्तीय वर्ष की दूसरी तिमाही तक 15362 कर्जदारों की आरसी लंबित थी।
इनसे 236.75 करोड़ रुपये की वसूली होनी थी। मगर सितंबर माह की समाप्ति तक 2242 बकायादारों ने 40.82 करोड़ रुपये वसूल किए गए। ऐसे में 17.24 प्रतिशत कर्ज में दी गई रकम बैंकों को वापस मिली। वहीं, जिलेवार स्थिति को देखें तो नैनीताल जिले में आरसी के सापेक्ष 183 बकायादारों ने 2.90 करोड़ रुपये का भी भुगतान किया है।

सिर्फ 2.90 प्रतिशत रकम बैंकों को वापस मिली। ऐसे में सबसे कम बकाया भुगतान करने वालों में नैनीताल जिला पहले स्थान पर रहा। वहीं, हरिद्वार जिले में वसूली नोटिस के सापेक्ष 74.84 प्रतिशत बकाया रकम लोगों ने बैंकों में जमा करवाई। इधर, वित्तीय वर्ष की समाप्ति को देखते हुए बैंक रिकवरी में जुटे हुए हैं।
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