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हाई रिस्क जोन में जोशीमठ का 35 प्रतिशत हिस्सा, जनसुनवाई में नगरवासियों ने बाहर बसने से किया इनकार

@शब्द दूत ब्यूरो (21 जनवरी, 2024)

पिछले साल नगर में हुए भू-धंसाव प्रभावितों की शासन के साथ जन सुनवाई हुई। नगर पालिका सभागार में आयोजित जनसुनवाई में आपदा प्रभावितों ने स्पष्ट कह दिया कि वह जोशीमठ से अन्यत्र विस्थापित नहीं होंगे। यहां से उनका रोजगार व अन्य संसाधन जुड़े हैं।

जोशीमठ के भू धंसाव प्रभावित नगर वासियों ने विस्थापन के नाम पर नगर से बाहर बसने से साफ इनकार कर दिया। स्थानीय लोगों का कहना है कि सेना व सरकारी विभागों के पास जो काश्तकारी भूमि है जिसका उन्हें मुआवजा नहीं मिला उन जगह पर लोगों को बसाया जाए।

जनसुनवाई के दौरान बताया गया कि शासन ने गौचर के पास बमोथ गांव में पुनर्वास के लिए 25 हेक्टेयर भूमि को चिह्नित किया है। आपदा सचिव के मुताबिक नगर को तीन जोन में बांटा गया है। जिसमें हाई रिस्क जोन, मीडियम जोन और लो रिस्क जोन शामिल हैं। हाई रिस्क जोन को पहले 17 सेक्टरों में बांटा गया था। तीन दिन के सर्वे के बाद इसे 14 सेक्टरों में बांटा है। हाई रिस्क जोन में नगर के प्रमुख स्थान शामिल हैं।

आपदा सचिव के मुताबिक सभी प्रभावित परिवारों को विकल्प दिए जाएंगे। भारत सरकार से चर्चा के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी। लोगों की सुविधा के अनुसार विस्थापन की कार्रवाई की जाएगी। लोगों के जो विकल्प आएंगे शासन स्तर पर उसी के अनुसार रणनीति तैयार की जाएगी। उन्होंने कहा कि नगर का 30 से 35 प्रतिशत हिस्सा हाईरिस्क जोन में है। वहीं जोशीमठ बचाओ संघर्ष समिति की ओर से आपदा सचिव को नौ सूत्रीय मांगों का ज्ञापन भी सौंपा गया।

आपदा सचिव के मुताबिक जनवरी माह से नगर में सभी तरह के निर्माण कार्य बंद हैं। यदि कोई निर्माण कार्य करता है तो उसे अवैध माना जाएगा और जिला प्रशासन के स्तर से संबंधित पर कार्रवाई की जाएगी।

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