@ शब्द दूत ब्यूरो (10 अक्तूबर 2023)
चीन सीमा को जोड़ने वाली धारचूला-लिपुलेख सड़क पर धारचूला से गुंजी तक का 72 किलोमीटर का सफर बेहद डरावना है। हर पल जान जोखिम में रहती है। अगर आपकी निगाह चूकी या फिर जरा सी सावधानी हटी तो आपकी जान तक जा सकती है। कब बोल्डर टूटकर सड़क पर गिरे और आप खबर बन जाएं।
फिलहाल इस सड़क पर पीएम मोदी के दौरे के मद्देनजर काम चल रहा है। धारचूला से आगे सड़क कटिंग का काम भी चल रहा है। बारिश के बाद सड़क कटिंग का मलबा कीचड़ में तब्दील हो जाता है। पांच-छह किलोमीटरआगे सड़क के एक ओर पहाड़ी पर अटके बोल्डरों के गिरने की आशंका तो दूसरी ओर काली नदी का डरावना शोर।
आपकी जरा सी चूक हजार फीट नीचे काली नदी में जल समाधि दिला सकती है। कुछ जगह हॉटमिक्स सड़क दिखती है तो लगता कि आगे रास्ता ठीक होगा लेकिन ये सिर्फ भ्रम ही साबित होता है। 500 मीटर चलने के बाद ही फिर उबड़-खाबड़ सड़क वाहन के साथ यात्रियों की भी परीक्षा लेने लगती है। जैसे-तैसे बुंदी से छियालेख तक 26 मोड़ पारकर यात्री छियालेख की चोटी पर पहुंचते हैं।
धारचूला से गुंजी तक 72 किलोमीटर का सफर तय करने में छह-साढ़े छह घंटे लग जाते हैं। इस सड़क पर खतरनाक चट्टानों को देखकर आपको समझ में आ जाएगा कि बीआरओ ने किन कठिन हालात में पहाड़ियां काटकर सड़क बनाई होगी। नजंग पार करने के बाद मालपा आ जाता है। यहीं साल 1998 में 60 कैलाश यात्रियों समेत 205 लोगों की दबकर मौत हो गई थी।
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