@शब्द दूत ब्यूरो (03 अक्तूबर, 2023)
चारधाम ऑलवेदर, ऋषिकेश कर्णप्रयाग रेल परियोजना के बाद परिवहन कनेक्टिविटी के मामले में प्रदेश सरकार एक और योजना पर गंभीरता से विचार कर रही है। इस योजना में केवल दो सुरंगे तैयार होने के बाद बदरी और केदार धाम तीर्थयात्रियों के और करीब आ जाएंगे।
इन सुरंगों के बन जाने के बाद देहरादून से गुप्तकाशी की दूरी करीब 100 किलोमीटर कम हो जाएगी, जबकि गंगोत्री से केदारनाथ जाने वाले तीर्थ यात्रियों को नया वैकल्पिक मार्ग मिलेगा। इससे उन्हें 55 किलोमीटर का फासला कम तय करना होगा।
दो महत्वकांक्षी योजनाओं के धरातल पर उतरने से यह कमाल होगा। पिछले कई वर्षों से टिहरी जिले के घनसाली से घुत्तु सड़क मार्ग से होकर गुप्तकाशी को रोड कनेक्टिविटी से जोड़ने का प्रस्ताव शासन में विचाराधीन है। सीमा सड़क संगठन यानी बीआरओ भी इस प्रस्ताव को सामरिक दृष्टि से बनाए जाने के पक्ष में है।
लोक निर्माण विभाग इस मार्ग का स्थलीय निरीक्षण करा चुका है। अब इस योजना पर नए सिरे मंथन शुरू हो गया है। वन संरक्षण अधिनियम में नए संशोधन के तहत सीमा से 100 किमी एरियल दूरी के दायरे में राष्ट्रीय सुरक्षा व सामरिक परियोजनाओं को राहत मिलेगी। इससे इस परियोजना को बनाने में आसानी होगी।
घनसाली से घुत्तु तक 31 किमी मार्ग को चौड़ीकरण व सुधारीकरण करना होगा। घुत्तु से रुद्रप्रयाग जिले के गुप्तकाशी तक करीब 11 किलोमीटर की एक टनल बनाए जाने से केदारनाथ जाने की दूरी कम हो जाएगी।
देहरादून जिले रानीपोखरी से टिहरी जिले की कोटी कॉलोनी यानी टिहरी झील के पास तक 35 किलोमीटर टनल बनाने की योजना है। दून से टिहरी जाने के लिए करीब 150 किलोमीटर की दूरी तय करनी होती है। रेलवे बोर्ड के साथ मिलकर इस योजना रेल-सड़क नेटवर्क के तौर पर तैयार करने पर विचार हो रहा है।
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