@शब्द दूत ब्यूरो (03 अगस्त 2023)
काशीपुर। शहर के अवरूद्ध विकास से परेशान हो चुके शहरवासी किसी भी नयी योजना की घोषणा होते ही एक अनजाने डर से सहम जाते हैं। दरअसल आर ओ बी और द्रोणासागर नहर के ऊपर कवरिंग की योजना को देखकर काशीपुर वासी आशंकित है।
कहावत है कि दूध का जला छाछ को भी फूंक-फूंक पीता है। पिछले दो दशकों से शहर की बदहाल हालत से दुखी जनता सूबे में डबल तो छोड़िए चार-चार इंजनों के बावजूद काशीपुर के विकास की रेल पटरी पर नहीं दौड़ पा रही है। इसके विपरीत नेताओं व जनप्रतिनिधियों के दावों से प्रभावित जनता क्षण भर के लिए तो वाह वाही कर बैठती है पर फ्लाईओवर के लंबे इंतजार को देखकर अब यहां की जनता इन दावों और वादों पर विश्वास नहीं कर पा रही है।
शहर के प्रमुख धार्मिक और पौराणिक स्थल गिरीताल व द्रोणासागर तीर्थ आज भी पूर्व में की गई सौन्दर्यीकरण की घोषणाओं के पूरा होने और विकास की बाट जोह रहे हैं। ऐसे में लक्ष्मीपुर माइनर की कवरिंग और अंडरपास बनाने की योजना क्या सिर्फ घोषणा मात्र बनकर रह जायेगी या फिर पूर्व घोषित योजनाओं की तरह मात्र श्रेय लेने मात्र के लिए है?
दरअसल आज जैसे ही काशीपुर की जलभराव की समस्या से निजात दिलाने के लिए केंद्र द्वारा स्वीकृत धनराशि की घोषणा की गई तो सोशल मीडिया पर स्थानीय नागरिकों ने चुटकी लेनी शुरू कर दी।
घोषणाएं कभी गलत नहीं होती। यह अपने आप में सत्य है लेकिन घोषणाओं पर अमल कितना और कैसे होता है? यह महत्वपूर्ण है। जलभराव की समस्या काफी पुरानी है। इसको लेकर शहर का हर नागरिक परेशान है। ऐसे में इस घोषणा से शहर के लोगों में सकारात्मक परिणाम की आशा होनी चाहिए। पर इसके विपरीत पुरानी योजनाओं का हश्र देखकर जनता आसानी से इस पर भरोसा नहीं कर पा रही है।
शहर के जनप्रतिनिधियों को सोचना होगा कि कि वह अपने द्वारा किये गये विकास की योजनाओं को धरातल पर अक्षरशः पूरा कर जनता का भरोसा प्राप्त करें। हालांकि ऐसी संभावना कम ही है।
सबसे ज्यादा शहर के नागरिकों का विश्वास फ्लाईओवर की धीमी निर्माण गति से टूटा है। आपको याद दिला दें कि निर्धारित समय पर फ्लाईओवर का काम पूरा नहीं हुआ तो पिछले दिनों एक बैठक में 20 अगस्त 2023 तक इसे पूरा करने की बात कही गई है। हालांकि इससे पहले भी कई बार तारीखें दी गई हैं। अब शहर के नागरिकों को 20 अगस्त का इंतजार है।
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