@शब्द दूत ब्यूरो ( 15 जुलाई 2023)
काशीपुर। जोशीमठ को लेकर स्थानीय लोगों व विशेषज्ञों ने बहुत पहले चेताया था कि यहां मकानों को खतरा हो सकता है। ठीक उसी तर्ज पर काशीपुर की अनेक कालोनियों के मकान खतरे की जद में आ गये हैं। हालांकि यहां कारण बारिश में कालोनियों में होने वाला जलभराव है। और जलभराव की शहर की समस्या बड़ी पुरानी है। इसके बावजूद स्थानीय प्रशासन और नगर निगम द्वारा कोई ठोस कार्ययोजना इसके लिए नहीं बनायी जा सकी है। अलबत्ता स्थानीय मेयर ऊषा चौधरी इस जलभराव के लिए नागरिकों को ही दोषी ठहराती हैं।
हर बार जब भी तेज बारिश होती है तो पूरा शहर जलमग्न हो जाता है। मेयर तर्क देती हैं कि बड़े बड़े शहरों तक में जलभराव हो जाता है। ऐसे में जलभराव की समस्या से नगर निगम द्वारा अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया जाता है। बीती रात हुई बारिश से हुआ जलभराव जहां लोगों के लिए समस्या के रूप में वही नगर निगम के लिए एक सामान्य बात हो गई है।
आज सुबह शहर की कालोनियों के निवासी जब उठे तो उनके कमरों यहां तक कि बेडरूम तक में पानी भरा हुआ था। सड़क की नालियों में जमा कचरे के साथ गंदगी घरों में प्रवेश कर गयी थी। कचरे को लेकर तर्क है कि ये कचरा नागरिक ही नालियों में डालते हैं।
आज सुबह जब निगम की गाड़ी कचरा लेने आईं तो एक तरफ तो लोग कचरा गाड़ी में डाल रहे थे दूसरी तरफ सड़क पर भरे गन्दे पानी में चल रहे थे।
लोगों का कहना है कि लगातार पानी भरने से उनके मकानों की नींव कमजोर हो रही है। कुछ मकान पुराने हैं जिन पर ज्यादा खतरा मंडरा रहा है।
कुछ कालोनियों में जलभराव के कारण से नगर निगम को लिखित में अवगत कराया जा चुका है। लेकिन निगम के अधिकारी प्रार्थना पत्र लेकर आश्वासन देने के बाद फिर कोई कदम नहीं उठा रहे हैं जिससे स्थिति काफी गंभीर हो रही है।
एक विशेष कारण यह है कि इस समस्या पर बरसात के दौरान ही लोग मुखर हो पाते हैं। और बरसात के दौरान निगम अधिकारियों का तर्क होता है कि आजकल बरसात में तो काम हो नहीं सकता और फिर बरसात बीतने के बाद लोग भूल जाते हैं निगम इस समस्या को ठंडे बस्ते में डाल देता है जब अगली बरसात आती है तो फिर लोग जलभराव का रोना रोते हैं निगम बरसात में काम नहीं हो सकता है। परिणामस्वरूप समस्या जस की तस बनी हुई है।
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