@शब्द दूत ब्यूरो (31 मई 2023)
काशीपुर। सैनिक कालोनी निवासी दिलीप डोबरियाल की मुश्किलों और मुफलिसी पर शब्द दूत की खबर पर अनेक लोगों ने मदद के लिए हाथ बढ़ाया है। ये देखकर काफी सुखद अनुभूति हुई। यहां तक कि कुछ ऐसे लोगों के फोन भी आये जिन्होंने मदद की पेशकश करते हुए खुद का नाम गोपनीय रखने की भी गुजारिश की।समाज के ऐसे लोग वास्तव में निस्वार्थ सेवा का उदाहरण हैं। शब्द दूत उनकी भावनाओं का सम्मान करते हुए उनके नाम सार्वजनिक नहीं कर रहा है।
वहीं शहर में समाज सेवी गगन कांबोज ने जब दिलीप डोबरियाल की स्थिति के बारे में पढ़ा तो वह भी द्रवित हो गये। उन्होंने भी इस परिवार की मदद का भरोसा दिलाया है। उन्होंने कहा कि वह दिलीप के समुचित उपचार की व्यवस्था कराने जा रहे हैं।
उधर एक अन्य समाजसेवी विजय सिंह बिष्ट की ओर से पीड़ित परिवार के घर जाकर उनकी विपन्न स्थिति की जानकारी ली गई। उन्होंने कहा कि आज हम कुछ लोग इनके घर गए थे। काफी ब्यवस्था हो गयी है । कल डॉक्टर से इनक परेशानी के बारे में भी बात करेंगे।
लेकिन इस खबर के प्रकाशन के बाद कुछ लोगों की नकारात्मक प्रतिक्रिया भी सामने आई। हालांकि हम खबर में उनके नाम देना जरूरी नहीं समझते। क्योंकि खबर का उद्देश्य पीड़ित परिवार की मदद करना था। और पीड़ित महिला ने जो कुछ बताया सिर्फ वही बताया गया है। इतना जरूर शब्द दूत बताना चाहता है कि नकारात्मक प्रतिक्रिया करने वाले व्यक्ति ने एक तरफ़ तो यह कहा कि वह महिला झूठी है उनके पास आई ही नहीं। लेकिन इसके बाद वही कहते हैं कि एक बार जब इसके मकान की चारदीवारी गिर गई तो पटवारी से मिलकर उन्होंने मदद कराई थी। हालांकि दीवार आज भी गिरी हुई है। मदद आखिर कैसी हुई ये कल तक उसके घर की टूटी दीवार बता रही है। साथ ही मीडिया पर भी प्रश्न चिन्ह उठाया है।
बहरहाल पीड़ित परिवार की मदद को लोग आगे आये हैं यही सबसे बड़ी संतोषजनक बात है।
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