@शब्द दूत ब्यूरो (07 अप्रैल 2023)
इंदौर। यहां प्रशासन द्वारा झूलेलाल मंदिर ढहाये जाने पर हिंदू संगठनों में भारी आक्रोश व्याप्त है। तमाम हिंदू संगठन इसके विरोध में प्रदर्शन कर रहे हैं। उधर मंदिर ढहाये जाने का भारी विरोध देखते हुए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आज ये घोषणा की कि ढहाये हुए मंदिर को फिर से वहीं स्थापित किया जायेगा। यह वही मंदिर है जहां बावड़ी ढहने से 36 श्रद्धालुओं की मौत हो गई थी।
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने राजधानी भोपाल में पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि “विगत दिनों इंदौर में हृदय विदारक दुर्भाग्यपूर्ण घटना घटित हुई थी। जिसके बाद हमने पूरे प्रदेश में कुएं- बावड़ियों को चिन्हित करने के निर्देश दिए थे। कुएं – बावड़ियों को भरना उपाय नहीं है। हमारा प्रयास है कि इनका जीर्णोद्धार कर जल स्त्रोतों के रूप में उपयोग किया जाए ।”
सीएम ने कहा कि इंदौर की घटना के बाद बावड़ी को भर दिया गया है। मंदिर अत्यंत प्राचीन था । इसलिए पूरी तरह से सुरक्षित रखते हुए सामंजस्य और सद्भाव के साथ फिर से मंदिर स्थापित किया जाएगा, ताकि श्रद्धालु फिर से वहां पूजा-अर्चन कर सकें।
उनके इस ऐलान से ठीक पहले इस प्राचीन मंदिर को ढहाए जाने पर रोष जताते हुए बड़ी तादाद में आज श्रद्धालु इंदौर में सड़क पर उतरे थे और इस धार्मिक स्थल को पुरानी जगह पर फिर से बनाये जाने का संकल्प जताया था।
आज प्रदर्शनकारी जुलूस के रूप में जिला मुख्यालय परिसर में दाखिल हुए। उन्होंने इस परिसर में जमकर नारेबाजी करने के बाद जिलाधिकारी डॉ.इलैयाराजा टी को जापन सौंपा ।
प्रदर्शनकारियों ने अपने हाथों में तख्तियां थाम रखी थीं जिन पर “मेरा क्या कसूर था : बेलेश्वर महादेव झूलेलाल मंदिर”, “बचाव कार्य में लेटलतीफी का दोषी कौन है”, “भोलेनाथ हम आएंगे, मंदिर वहीं बनाएंगे” जैसे नारे लिखे गए थे।
प्रदर्शन में शामिल संगठन “समग्र सिंधी समाज” के नेता दीपक खत्री ने संवाददाताओं से कहा,“बेलेश्वर महादेव झूलेलाल मंदिर में हुआ भीषण हादसा बेहद दुःखद था। लेकिन प्रशासन ने गलत कदम उठाते हुए इस मंदिर को ही ढहा दिया, जबकि कार्रवाई उन दोषियों पर होनी चाहिए थी जिनकी वजह से यह हादसा हुआ था।”
खत्री ने कहा, “मंदिर ढहाये जाने को लेकर हिंदू समुदाय में बहुत रोष है। मंदिर तो वहीं बनेगा जहां इसे ढहाया गया था। हम सब मिलकर दोबारा मंदिर बनाएंगे।”
प्रदर्शनकारियों से ज्ञापन लेने के बाद जिलाधिकारी इलैयाराजा ने कहा, ” प्रशासन लोगों की धार्मिक आस्था और भावनाओं का सम्मान करता है। हम विधिनुसार कदम उठाएंगे।”
अधिकारियों ने बताया कि बेलेश्वर महादेव झूलेलाल मंदिर की फर्श 30 मार्च को रामनवमी के हवन-पूजन के दौरान इस तरह धंस गई थी कि बावड़ी में गिरकर 21 महिलाओं और दो बच्चों समेत 36 लोगों की जान चली गई थी।
प्रशासन ने हादसे के चार दिन बाद तीन अप्रैल को बेलेश्वर महादेव झूलेलाल मंदिर के देवी-देवताओं की मूर्तियां अन्य देवस्थान में पहुंचाई थीं और आम लोगों की सुरक्षा का हवाला देते हुए बेलेश्वर महादेव झूलेलाल मंदिर को ढहा दिया था। इसके साथ ही, भीषण हादसे की गवाह रही बावड़ी को मलबा डालकर हमेशा के लिए बंद कर दिया गया था।
Shabddoot – शब्द दूत Online News Portal
