@शब्द दूत ब्यूरो (18 मार्च 2023)
काशीपुर। कुमाऊं का शहर काशीपुर सदियों से बसा हुआ है। हालांकि तब इस शहर को काशीपुर नहीं गोविषाण कहा जाता था। तब यह एक प्रमुख धार्मिक व व्यापारिक केंद्र था। आईये बताते हैं इस शहर के अतीत के इतिहास को। विभिन्न इतिहास की पुस्तकों व अन्य माध्यमों से संकलित जानकारी इस लेख में दी गई है।
इस शहर का इतिहास हर्षवर्धन (६०६-६४७) से लेकर महाभारत काल तक जाता है। हर्ष के समय के पुरास्थल अभी भी यहा देखे जा सकते है। पुराणों में इसको उज्जनक नाम से लिखा गया है। हर्ष के समय काशीपुर को गोविषाण के नाम से जाना जाता था। चीनी यात्री ह्वेन सांग (६३१-६४१) ने भी काशीपुर की यात्रा की थी।
काशीपुर के इतिहास को खोजने के लिए यहां सबसे पहले १९५२ में खुदाई की गई। उसके बाद १९७०-७२ और सबसे आखिर में २००२-०३ में यहां खुदाई की गई। यहां हुई खुदाई में हर्ष के समय के मंदिर और शहर के अवशेष मिले हैं।आज के शहर से लगभग दो किलोमीटर दूर पुरानी बसावट मिली है। यहां मिले मिट्टी के बर्तनो, सिक्को, इमारतों की बनावट से ये पता चलता है कि शहर महाभारत काल से ही अस्तित्व में है।
यहां जिन चित्रों को आप देख रहें हैं वो वहां मिले मंदिर के हैं जो कि हर्ष के समय का है। इस को पक्की ईंटो से बनया गया है। बाहरी दीवारो पर लगी ईंटों की चमक आज पन्द्रह सौ साल बाद भी बरकरार है। ये इलाका कई एकड में फैला हुआ है।
यहा आज भी पूरा शहर दबा पडा है। पूरे इलाके में उस जमाने की ईटें बिखरी पडी हैं।
Shabddoot – शब्द दूत Online News Portal