@शब्द दूत ब्यूरो (17 फरवरी2023)
काशीपुर। देवभूमि पर्वतीय महासभा में विवाद बढ़ता ही जा रहा है। पूर्व अध्यक्ष रहे सुरेंद्र सिंह जीना के विरुद्ध दूसरे पक्ष की ओर से बीते दिवस कूर्माचल कालोनी स्थित पर्वतीय महासभा के भवन पर चुनावी प्रक्रिया रोकने संबंधी आदेश चस्पा करने के बाद वहां माहौल तनावपूर्ण हो गया। उधर उपजिलाधिकारी का कहना है कि निबंधक के चुनाव रोकने के पत्र को चस्पा करने का कोई निर्देश प्रशासन को नहीं मिला है।
बता दें कि देवभूमि पर्वतीय महासभा में दो पक्षों के बीच आरोप प्रत्यारोप चल रहा है। सुरेंद्र सिंह जीना पर लगाए गए आरोपों को लेकर यहां उपजिलाधिकारी अभय प्रताप सिंह के समक्ष सुनवाई चल रही है। जिसका निर्णय अभी आना है। लेकिन बीते रोज दूसरे पक्ष ने निबंधक के आदेश को पर्वतीय महासभा के भवन पर चस्पा कर दिया। पूर्व अध्यक्ष सुरेंद्र सिंह जीना ने जब उस पत्र को निकाला तो वहां मौजूद दूसरे पक्ष के साथ उनकी जोरदार बहस हुई। सुरेंद्र सिंह जीना का कहना था कि पर्वतीय सभा भवन पर फिलहाल नये चुनाव होने तक उनकी जिम्मेदारी बनती है। उन्होंने बताया कि जब यह आदेश उन्हें मिल चुका है और इससे संबंधित समाचार भी प्रकाशित हो चुके हैं। ऐसे में निबंधक का आदेश पर्वतीय सभा भवन पर चस्पा करने का कोई औचित्य नहीं बनता।
वहीं दूसरे पक्ष की ओर से वहां मौजूद आर सी पांडे तथा गणेश चंद्र सुयाल का आरोप है कि निबंधक के चुनाव रोकने के निर्देश के बावजूद चुनाव प्रक्रिया जारी रखना उनके आदेशों का उल्लघंन है।
यहां यह बात उल्लेखनीय है कि निबंधक के पत्र में अध्यक्ष व सचिव को संबोधित किया गया है जबकि आपत्ति जताने वाले प्रदीप जोशी को निवर्तमान उपाध्यक्ष से संबोधित किया गया है। वैसे भी निबंधक के चुनाव रोकने संबंधी पत्र में उक्त आदेश को चस्पा करने का कोई निर्देश नहीं दिया गया है। ऐसे में प्रशासन जिस मामले की जांच कर रहा है उसमें एक पक्ष द्वारा यह आदेश चस्पा करने से माहौल बिगाड़ने की कोशिश की जा रही है। जब न्यायालय मामले की सुनवाई कर रहा है तो कानूनी प्रक्रिया पर भरोसा होना चाहिए।
एक ख़ास बात बीते रोज पर्वतीय महासभा भवन में हुई इस घटना का सीसीटीवी फुटेज एक पक्ष द्वारा मीडिया को उपलब्ध कराई गई है। सुनियोजित ढंग से विवाद की सुनवाई के दौरान किसी पक्ष द्वारा मामले को तूल दिया जा रहा है।
ऐसे में यह भी गौरतलब है कि देवभूमि पर्वतीय महासभा में तमाम वरिष्ठ सदस्यों की इस विवाद में चुप्पी आश्चर्यजनक है। काशीपुर में तीस हजार से अधिक पर्वतीय समाज के लोगों की भावनाओं के साथ चंद लोगों द्वारा खुलेआम खिलवाड़ किया जा रहा है। कुछ लोगों का कहना है कि दो चार सदस्यों और पदाधिकारियों की वजह से शहर में पूरे पर्वतीय समाज की प्रतिष्ठा को धक्का लग रहा है। वहीं तमाम पर्वतीय महासभा के सदस्यों का मत है कि प्रशासन को इस महासभा के कुछ लोगों द्वारा खड़े किये जा रहे विवाद को देखते हुए इसके चुनाव अपने निर्देशन में कराये जाने चाहिए। अन्यथा जिस तरह की स्थिति पैदा की जा रही है उससे कभी भी कोई गंभीर घटना हो सकती है।
दरअसल एक ओर विवाद की सुनवाई की जा रही है तो दूसरी तरफ शासन प्रशासन पर अविश्वास दर्शाते हुए एक पक्ष की ओर से कल पर्वतीय महासभा भवन पर निबंधक के आदेश की कापी चस्पा कर उकसाने की कोशिश की जा रही है।
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