@शब्द दूत ब्यूरो (29 जनवरी 2023)
काशीपुर । शहर में पिछले कई वर्षों से पर्वतीय समाज के लोगों की सिरमौर बनी संस्था राजनीतिक मंच मात्र बनकर रह गई है। शायद यही कारण है कि यह संस्था विवादों में घिरती जा रही है।
वर्तमान में देवभूमि पर्वतीय महासभा सत्ताधारी दल भाजपा का अनुषांगिक संगठन के रूप में कार्य करने लगी है। पर्वतीय समाज के लोगों के हित की अपेक्षा एक पार्टी विशेष के लिए काम करने के चलते अधिकांश पर्वतीय मूल के लोगों में इसके सामाजिक संगठन का चेहरा बदल गया है। राजनीतिक लोगों को महत्व देने की वजह से इस संस्था की मूल भावना कहीं विलुप्त हो चुकी है।
दरअसल पर्वतीय महासभा का गठन पर्वतीय लोगों की अपनी संस्कृति और सम्मान की लड़ाई के लिए किया गया था। लेकिन राजनेताओं से इसकी निकटता ने इस मूल उद्देश्य को भटका दिया। ऐसे में स्वाभाविक है कि एक आम पर्वतीय जन ने भी इसे राजनीतिक मंच के चश्मे से देखना शुरू कर दिया।
इस महासभा के पद पर आने के बाद अधिकांश पदाधिकारियों ने अपने राजनीतिक हित साधने शुरू कर दिये। समय-समय पर राजनेताओं का सम्मान करने के कार्यक्रमों ने भी देवभूमि पर्वतीय महासभा के राजनीतिक मंच होने का प्रमाण दिया है। ऐसे अवसर कम ही आये हैं जब देवभूमि पर्वतीय महासभा द्वारा पर्वतीय समाज के अन्य क्षेत्रों से जुड़ी प्रतिभाओं को मंच पर सम्मान दिया हो। एक आध उदाहरण अपवाद के रूप में भले ही सामने आया हो। शहर में ऐसी अनेक सामाजिक संस्थायें हैं लेकिन उनमें राजनीति हावी नहीं दिखाई देती।
अब एक बार फिर देवभूमि पर्वतीय महासभा के चुनावों की तैयारी शुरू कर दी गई है। इस बार भी राजनीतिक दलों से जुड़े पर्वतीय समाज के लोगों ने दावेदारी शुरू कर दी है।
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