@शब्द दूत ब्यूरो (19 दिसंबर, 2022)
समय के साथ पहाड़ में बहुत कुछ बदला है। तेजी से हो रहे विकास ने जहां एक ओर रोजमर्रा की लाइफ स्टाइल का नजरिया तो बदला ही है, साथ ही खानपान रहन-सहन के तरीकों ने सभ्यता और संस्कृति से दूर कर दिया है। इन सबके बीच नैनीताल जिला प्रशासन पुराने दिनों को पर्यटन योजना के तहत लौटाने की योजना बना रहा है, जिसमें देश-विदेश के पर्यटक मड यानि मिटटी से से बने घरों का आनंद ले सकेंगे।
नैनीताल जिला प्रशासन की पहल से फिलहाल जिले के चार गांवों में मड हाउस टूरिज्म शुरु करने की योजना पर काम हो रहा है। गांव में मिट्टी के घर तैयार किए जायेंगे तो पहाड़ी खानपान का भी स्वाद टूरिस्टों को मिलेगा। सीमेंट, ईंट और रोड़े से बिलकुल अलग भूकंप रोधी इन घरों में बीते दिनों की यादों को लौटाने की पहल की जा रही है। हांलाकि जिला प्रशासन इन मड हाउसों के साथ खेती बागवानी को भी जोड़ने पर भी काम कर रहा है।
दरअसल, जिला प्रशासन ने इसके लिये गीली मिट्टी संस्था से एमओयू साईन किया है। मिट्टी से तैयार इन घरों में ना गर्मी का एहसास होता है, ना ही ठंड लगती है। इन घरों में गजब की बात ये है कि इनमें चारपाई से लेकर कुर्सी तक भी मिट्टी से ही तैयार की जाती है। वहीं, ये घर स्वास्थ्य के लिये भी बेहतर माने जाते हैं. 100 से 500 साल से भी ज्यादा समय तक यूं ही रहने वाले इन घरों को अर्थ बैग, कॉब, एडोबी, टिंबर फ्रेम, लिविंग रूम में तैयार किया जा रहा है।
उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में सालों से मिट्टी, पत्थर और गारे के मकान बनाए जाते रहे हैं, लेकिन अब इनकी जगह सीमेंट, सरिया, ईंट और रोड़ी ने ले ली है, जो पर्यावरण के साथ स्वास्थ्य के लिए भी घातक हैं। पहाड़ों के कंक्रीट के जंगल में तब्दील होने से पर्यावरण को खतरा भी बढ़ रहा है।
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