@शब्द दूत ब्यूरो (12 अक्टूबर 2022)
हल्द्वानी । कहते हैं कि बोलने से पहले शब्दों का चयन जरूर कर लें और बोलते समय हर किसी की जबान फिसल जाया करती है। खासकर जब किसी राजनीतिक दल के नेता के भाषण के दौरान ऐसा होता है तो उस पर बवाल मच जाना स्वाभाविक है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर हर किसी छोटे बड़े नेता अपने संबोधन के दौरान कुछ ऐसा बोल जाते हैं जो कि लोगों को अप्रिय लग जाता है। हां, राजनेता के किसी ऐसे बयान के बाद विपक्षी राजनीतिक दल उस बयान को लेकर हमलावर हो जाते हैं।
इस बार हम बात कर रहे हैं उत्तराखंड के पूर्व भाजपा प्रदेश अध्यक्ष और कैबिनेट मंत्री रहे बंशीधर भगत की। बीते रोज हल्द्वानी में अंतर्राष्ट्रीय बालिका दिवस पर संबोधन के दौरान बंशीधर भगत कुछ ऐसा कह गये कि विपक्ष उन पर हमलावर हो गया है। सोशल मीडिया पर उनके इस बयान को लेकर खूब चर्चा चल रही है।
दरअसल बंशीधर भगत यह कह बैठे कि ज्ञान चाहिए तो देवी की सरस्वती को पटाओ और शक्ति चाहिए तो देवी दुर्गा को पटाओ यही नहीं धन के लिए उन्होंने देवी लक्ष्मी को पटाने की सलाह दे डाली। वहीं उन्होंने शिवजी और विष्णु भगवान पर भी टिप्पणी कर दी। लेकिन बंशीधर भगत से इस पूरे प्रकरण में गलती यह हुई कि उन्होंने शब्दों का चयन गलत कर दिया। बंशीधर भगत ने “मनाओ” शब्द का “पटाओ” की जगह प्रयोग करना था। पर भाषण देते समय रौ में बहकर उनके मुंह से पटाओ निकल गया। इसी पटाओ शब्द ने सूबे में बवाल मचा दिया। अब भाजपा जो कि अन्य दलों के नेताओं के फिसलती जुबान पर कटाक्ष करने में कोई कसर नहीं छोड़ती तो उसे भी अपने इस वरिष्ठ नेता की फिसली जुबान पर चुप्पी साधनी पड़ रही है।
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