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विशेष :एक के बाद एक घोटालों के बाउंसर और धाकड़ धामी की ताबड़तोड़ बल्लेबाजी ,कहीं अपने ही तो नहीं कर “गेंदबाजी”?

@विनोद भगत

उत्तराखंड में एक के बाद एक भर्ती घोटाले के बाउंसर फेंके जा रहे हैं और सीएम पुष्कर सिंह धामी मैदान में ताबड़तोड़ बल्लेबाजी कर सभी बाउंसर का डट कर मुकाबला कर रहे हैं।

आजादी के अमृत महोत्सव के दौरान सीएम धामी को राज्य में भर्ती घोटाले के मामलों से जूझना पड़ रहा है। सीएम धामी के मौजूदा मंत्रिमंडल और पूर्व मंत्रियों के एक के बाद एक अपने चहेतों को बैकडोर से भर्ती के मामले नित नये नये निकल कर आ रहे हैं। एक ओर जहाँ सीएम धामी सख्त रुख अपनाते हुये परीक्षा व भर्ती घोटाले के आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की बात कह रहे हैं तो तुरंत एक और नया मामला खुल कर आ जाता है।

परीक्षा भर्ती घोटाले पर कांग्रेस को बैकफुट पर डालने के उद्देश्य से सीएम ने 2015 की पुलिस भर्ती मामले की जांच की बात कहकर विपक्ष को सकते में डाल दिया है। उधर विधानसभा और सचिवालय में भर्ती को लेकर सूबे का माहौल गरमा गया है। ये तो गनीमत है कि उत्तराखंड भाजपा शासित राज्य है वर्ना अब तक यहाँ तमाम सरकारी एजेंसी सक्रिय हो चुकी होती। और यही भाजपा सीबीआई, ईडी जैसी संस्थाओं को राज्य के इस बड़े घोटाले की परतें खोलने में लगा चुकी होती। जैसा कि हाल ही में देश के गैर भाजपा शासित राज्यों में देखने को मिला है।

उधर एकाएक उत्तराखंड में घोटालों के खुलने का सिलसिला कहीं मौजूदा सीएम धामी के खिलाफ अपनों की साजिश तो नहीं है? यह सवाल भी राजनीतिक गलियारों में कौंध रहा है। लगातार दूसरी बार एक युवा के मुख्यमंत्री बनने पर क्या उत्तराखंड के कुछ वरिष्ठ भाजपा नेताओं को रास नहीं आ रहा है। इधर कुछ दिन पहले पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत के समर्थक राज्य के डीजीपी से मिलकर ज्ञापन सौंप चुके हैं कि प्रदेश सरकार को अस्थिर करने का उन पर जो आरोप लगाया गया है वह झूठ है और ऐसे लोगों के विरुद्ध कार्रवाई की भी मांग की गई है।

उत्तराखंड के 22 साल के इतिहास में पुष्कर सिंह धामी ही एकमात्र ऐसे मुख्यमंत्री हैं जो विकास और ऊर्जा की सोच रखते हैं। दोबारा सीएम बनना उनकी बहुत बड़ उपलब्धि है। और कई वरिष्ठ भाजपा नेता फिलहाल हाशिये पर नजर आ रहे हैं।

वैसे इन घोटालों से फिलहाल कांग्रेस को कोई लाभ होता नजर नहीं आ रहा है क्योंकि प्रचंड बहुमत से सूबे में भाजपा की सरकार है। तो फिर एकाएक इतनी बड़ी मात्रा में उत्तराखंड में घोटालों की बाढ़ के पीछे क्या किसी की राजनीतिक महत्वाकांक्षा तो नहीं है?

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