@शब्द दूत ब्यूरो (03 अगस्त, 2022)
गुलदार के हमलों के बाद उत्तराखंड में अब सांपों की दहशत छाने लगी है। बारिश के मौसम में राज्य में सांप के डसने के रोजाना 10 से ज्यादा केस आ रहे हैं। यानी गुलदार के हमलों के बाद स्नेक बाइट के केस में इजाफा हो रहा है, जो स्वास्थ्य विभाग के लिए भी चिंता का सबब बन गया है, क्योंकि एक स्नेक बाइट के केस में ही 40 के करीब वैक्सीन मरीज़ को लगाई जाती हैं।
उत्तराखंड में गुलदार के बाद सांप के डसने के मामले में मौत सबसे ज्यादा है, 2021 के रिकॉर्ड के मुताबिक 2021 में स्नेक बाइट में 21 लोगों की जान गई थी, जबकि 22 लोग गुलदार के हमले में जान गंवा चुके थे। इस साल भी पिछले छह महीने में सांप से डंसने के 300 से ज्यादा केस आये है। राजधानी देहरादून के दून मेडिकल कॉलेज में इमर्जेंसी सेवा में तैनात डाक्टरों के अनुसार रोजाना सर्पदंश के दो से तीन केस रिकॉर्ड किए जा रहे हैं।
सर्पदंश से पीड़ित व्यक्ति का ब्लड सैंपल लेने के बाद आगे का इलाज दिया जाता है। डाक्टरों का कहना है कि स्नेक बाइट में 10 फीसदी सांप ही जहरीले होते हैं, जिनमें इलाज में 40 वैक्सीन तक मरीज को लगाई जाती है। सबसे पहले मरीज़ को टिटनस का इंजेक्शन लगाया जाता है, पीड़ित का ब्लड सैंपल लेने के बाद आगे का इलाज किया जाता है, वैसे दून मेडिकल कॉलेज में स्नेक बाइट का निशुल्क इलाज किया जाता है।
वहीं सर्पदंश के इलाज के लिए प्राइवेट अस्पताल शुरूआती इलाज के लिए मरीज से 10 से 20 हजार तक वसूलते हैं। फिलहाल बरसात के मौसम में हल्द्वानी, कोटद्वार, देहरादून जैसे मैदानी ज़िलों में स्नेक बाइट के केस ज्यादा सामने आ रहे हैं। आपातकालीन 108 कॉल सेन्टर में भी सांप से डंसने के मामले लगातार दर्ज हो रहे हैं।
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