@शब्द दूत ब्यूरो (02 अगस्त, 2022)
उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में माॅनसून के आगाज के बाद इस बार हालात कुछ अलग से नज़र आ रहे हैं। खासकर जुलाई में अगर बीते पांच सालों के आंकड़े देखें तो अब तक सबसे कम बारिश हुई है। यह बात अलग है कि कुछ इलाकों में इन्द्रदेव जमकर बरसे हैं। इधर, नैनीताल और चमोली ज़िले में बारिश के कारण आम जनजीवन अस्तव्यस्त बना हुआ है।
उत्तराखंड के पहाड़ों में आमतौर पर जुलाई में सबसे अधिक बारिश होती है। राज्य में इसी महीने आसमानी आफत का भी तांडव दिखाई देता है, लेकिन इस बार मौसम का मिजाज पूरी तरह बदला हुआ है। विवेकानंद पर्वतीय कृषि अनुसंधान शाला के मुताबिक इस बार बीते महीने सिर्फ 124 एमएम बारिश दर्ज की गई जबकि पिछली जुलाई में 209 एमएम बारिश दर्ज की गई थी।
पहाड़ों में कुल बारिश भले ही इस बार कम हुई होए लेकिन कई इलाकों में आसमानी आफत जमकर बरसी है। यही वजह है कि बादल फटने और लैंडस्लाइड जैसी घटनाएं भी सामने आईं हैं। विवेकानंद पर्वतीय कृषि अनुसंधान शाला के निदेशक डाॅ. लक्ष्मीकांत का कहना है कि बीते कुछ सालों में मौसम चक्र में काफी बदलाव दिख रहा है.अभी तक जो बारिश हुई है उससे खेती और बागवानी को नुकसान नहीं पहुंचा, लेकिन अगर मौसम का मिजाज यूं ही रहा तो दिक्कतें बढ़ सकती हैं।
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