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चीन भारत के संबंध दुनिया में स्थिरता के परिचायक हों :एस जयशंकर

बीजिंग। पाकिस्तान के साथ भारी तनाव भरे रिश्तों के बीच भारत और चीन के संबंधों में स्थिरता के उद्देश्य से भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर इन दिनों चीन की यात्रा पर हैं। गत रविवार को चीन पहुंचे भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि आज पूरी दुनिया अनिश्चितता के माहौल में है। ऐसे में भारत और चीन की भूमिका का बड़ा महत्व है। उन्होंने कहा कि कि दोनों देशों को अपने संबंधों में  स्थिरता का परिचय देना चाहिए। भारत के विदेश मंत्री ने यह बात आज कही। 

चीन के विदेश मंत्री वांग यी से मुलाकात के दौरान  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी के बीच हुई शिखर बैठक का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, ‘मैं, उस वुहान शिखर सम्मेलन के बाद यहां आ कर आज बहुत खुश हूं, जहां वैश्विक और क्षेत्रीय मुद्दों पर हमारे नेताओं के बीच आम सहमति और व्यापक हुई थी। रविवार  को चीन की राजधानी पहुंचे जयशंकर ने चीनी उपराष्ट्रपति वांग क्विशान से झोंग्ननहाई से उनके आवासीय परिसर में मुलाकात की। बाद में उन्होंने विदेश मंत्री वांग यी के साथ बैठक की, जिसके बाद एक प्रतिनिधिमंडल स्तर की बैठक हुई।

राष्ट्रपति शी जिनपिंग के भरोसेमंद समझे जाने वाले वांग के साथ मुलाकात के दौरान अपनी शुरुआती टिप्पणी में जयशंकर ने कहा, ‘हम दो साल पहले अस्ताना में एक आम सहमति पर पहुंचे थे कि ऐसे समय में जब दुनिया में पहले से अधिक अनिश्चितता है, हमारे संबंध स्थिरता के परिचायक होने चाहिए।जयशंकर ने कहा कि वह बहुत खुश हैं  कि उनके  कार्यकाल की शुरुआत में ही उन्हें  यहां आने और हमारे दो नेताओं के बीच अनौपचारिक शिखर सम्मेलन की तैयारी करने का अवसर मिला, जिसे हम शीघ्र ही देखने की उम्मीद करते हैं।’ जयशंकर का स्वागत करते हुए, उपराष्ट्रपति वांग ने कहा, ‘मुझे यह भी पता है कि आप चीन में सबसे लंबे समय तक रहने वाले भारतीय राजदूत हैं और आपने हमारे दोनों देशों के संबंधों में महत्वपूर्ण योगदान दिया। 

   उपराष्ट्रपति ने आशा व्यक्त की कि भारतीय विदेश मंत्री की इस यात्रा से चीन और भारत के संबंध सकारात्मक होंगे और आगे बढ़ेंगे।  यह यात्रा द्विपक्षीय संबंधों को और आगे बढ़ाएगी। दोनों देशों के विदेश मंत्रियों ने  सांस्कृतिक और दोनों देशों के लोगों के आपसी संपर्क पर उच्च-स्तरीय तंत्र की दूसरी बैठक की सह-अध्यक्षता की। पहली बैठक पिछले साल नई दिल्ली में हुई थी। समझा जाता है कि जयशंकर की यात्रा के दौरान 4 सहमति पत्रों (MoU) पर हस्ताक्षर किए जाएंगे। उनकी यात्रा के दौरान इस साल राष्ट्रपति शी के भारत दौरे की तैयारियों को अंतिम रूप देने सहित कई मुद्दों पर बातचीत होगी।

मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल की शुरुआत के बाद जयशंकर चीन का दौरा करने वाले पहले भारतीय मंत्री हैं। यहाँ बता दें कि कुछ दिन पूर्व पाकिस्तानी  विदेश मंत्री भी चीन पहुंचे थे। तब पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने भारत द्वारा कश्मीर को विशेष दर्जा खत्म करने के मुद्दे को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में उठाने को लेकर चीन से समर्थन मांगने के लिए 9 अगस्त को बीजिंग की यात्रा की थी। भारत ने लगातार कहा है कि जम्मू-कश्मीर उसका अभिन्न अंग है और यह देश का एकदम आंतरिक मामला है।

 

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