@शब्द दूत ब्यूरो (23 जुलाई 2022)
उत्तराखंड में कांग्रेस में एक बार फिर खलबली मच गई है। हाल ही में हुये राष्ट्रपति चुनाव में यह बात खुलकर सामने आ गई है। अब पार्टी के तमाम वरिष्ठ नेता उस विधायक की खोज में हैं जिसने चुनाव के दौरान अपना मत एनडीए उम्मीदवार के पक्ष में दे दिया है।
उत्तराखंड में सत्तारूढ़ भाजपा के 47 विधायक हैं, जबकि दो निर्दलीय और बसपा के दो विधायकों ने भी राजग प्रत्याशी के समर्थन की घोषणा की थी। इस तरह राजग प्रत्याशी को 51 विधायकों का समर्थन संभावित था। हालांकि भाजपा विधायक चंदन रामदास बीमारी की वजह से मतदान नहीं कर पाये। लेकिन इसके बावजूद राजग प्रत्याशी को 51 मत मिले।
उधर कांग्रेस के 19 विधायकों में से 17 ने ही मतदान किया था, दो अनुपस्थित रहे थे। इनमें तिलकराज बेहड़ और राजेंद्र भंडारी के नाम शामिल हैं। अगर यह माना जाए कि अवैध हुआ एक विधायक का वोट भी कांग्रेस का था, तो फिर भी कांग्रेस के एक विधायक ने क्रास वोटिंग की।
राष्ट्रपति चुनाव में भाजपा ने दो निर्दलीय और दो बसपा सदस्यों का विश्वास भी जुटा लिया था। इस तरह राजग की प्रत्याशी मुर्मू को 50 मत ही मिलने चाहिए थे, लेकिन उन्हें 51 वोट मिले हैं। साफ है कि यह वोट कांग्रेस विधायक ने दिया है। कांग्रेस के दो विधायक मतदान में शामिल नहीं हुए थे। इस हिसाब से यूपीए उम्मीदवार यशवंत सिन्हा को 17 वोट मिलने चाहिए थे, लेकिन उन्हें 15 ही वोट मिले।
राष्ट्रपति चुनाव संपन्न हो गया और द्रोपदी मुर्मू राष्ट्रपति निर्वाचित भी हो गई। लेकिन उत्तराखंड कांग्रेस में इस चुनाव के बाद खलबली मच गई है। आखिर कौन वो विधायक है कांग्रेस का जिसने राजग उम्मीदवार के पक्ष में वोट किया। पार्टी के वरिष्ठ नेता असमंजस में पड़ गए हैं। अब जोर शोर से उस कांग्रेस विधायक की तलाश में जुट गए हैं।
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