@शब्द दूत ब्यूरो (20 जुलाई, 2022)
उत्तराखंड में लगातार हो रही बारिश से टिहरी डैम की झील का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। टिहरी झील से सटे आसपास के गांवों में भूस्खलन और भूधंसाव का खतरा बढ़ गया है। झील से सटे ऊठड़, पिपोला, भटकंडा, नंदगांव सहित करीब एक दर्जन गांवों में मकानों में दरारें बढ़ रही हैं, तो कई मकान बल्लियों के सहारे टिके हैं। भारी बारिश का प्रभाव खेतों में भी देखा जा सकता है। खेतों में धंसाव के चलते खेती करना जोखिम भरा बन गया है।
टिहरी बांध से सटे गांवों में ग्रामीणों को मकान के गिरने का डर सता रहा है। डर का आलम ये है कि ग्रामीण रात में बारिश होने पर चौखट पर बैठकर पूरी रात जागकर बिता रहे है। लंबे समय से टिहरी झील प्रभावित ग्रामीण विस्थापन की मांग कर रहे है, लेकिन अभी तक आंशिक डूब क्षेत्र के गांवों का न तो विस्थापन हो पाया और न ही इन्हें मुआवजा मिला है।अब एक बार फिर से बरसात ग्रामीणों के लिए आफत बनकर आई है और ग्रामीण फिर से दहशत के साए में जीने को मजबूर है।
टिहरी डैम की झील से प्रभावित इन गांवों में ग्रामीण बरसात में लगातार डर के साए में जीने को मजबूर हैं। एक्सपर्ट कमेटी द्वारा झील प्रभावित गांवों का सर्वे भी कराया गया और करीब 17 गांवों के 415 परिवारों का विस्थापन या मुआवजा देना प्रस्तावित है, लेकिन अभी तक आंशिक डूब प्रभावित इन गांवों को मुआवजा देने की कार्रवाई आगे नहीं बढ़ पाई है। टिहरी डैम की झील से प्रभावित ग्रामीण लंबे समय से विस्थापन की बाट जोह रहे हैं लेकिन कार्रवाई अभी तक सिर्फ फाइलों में चल रही है और अब एक बार फिर से बरसात शुरू होने से ग्रामीण डर के साए में जीने को मजबूर हैं।
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