@शब्द दूत ब्यूरो (15 जुलाई, 2022)
उत्तराखंड कांग्रेस के भीतर नेताओं के बीच चल रही जंग शांत होती नहीं दिख रही है। एक बार फिर पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत और भाजपा छोड़ कांग्रेस में आए हरक सिंह रावत एक बार फिर आमने-सामने हैं। खबर है कि दोनों के बीच जुबानी जंग को शांत कराने के लिए प्रदेश कांग्रेस प्रभारी देवेंद्र यादव बैठक करने जा रहे हैं।
असल में पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने पूर्व मंत्री हरक सिंह रावत के हालिया बयानों के देखते हुए उनपर गहरी टिपण्णी कर दी। हरीश रावत ने सोशल मीडिया पर हरक का नाम लिये बगैर कह दिया कि कांग्रेस हरक सिंह जैसे नेता को लेकर अपना रुख साफ करे। उन्होंने कहा कि पार्टी ऐसे नेताओं पर अपनी राय स्पष्ट करे जो भाजपा से खदेड़े जाने के बाद कोई ऑप्शन न होने के कारण पार्टी में आ गए हैं।
गौरतलब है कि हरक सिंह ने पूर्व नेता प्रतिपक्ष प्रीतम सिंह गुट के साथ नजदीकियां बढ़ाते हुए बैठक तो की ही, साथ ही वे देहरादून में महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी से भी मुलाकात कर आए। इन मुलाकातों के बाद हरक सिंह ने हरीश रावत के खिलाफ मोर्चा खोल दिया और यह आरोप लगा दिया कि हरीश रावत की अगुवाई में प्रदेश में कांग्रेस कमज़ोर हुई और हरीश रावत की राजनीति गंभीर नहीं है।
हरक सिंह की इन हालिया गतिविधियों को देखते हुए हरीश रावत ने सोशल मीडिया पर अपने गुस्से का इजहार तो किया ही साथ ही सोशल मीडिया पर एक लंबा पोस्ट लिख डाला। हरक सिंह का नाम लिए बैगैर उन्होंने लिखा, ‘हम मान रहे थे कि भाजपा के लोकतंत्र विरोधी चेहरे को पहचान लेने और भाजपा के सिद्धांतों से मोहभंग होने के चलते वह कांग्रेस में लौटे, लेकिन सच यह है कि भाजपा ने उन्हें निकाला और उनके पास कोई ऑप्शन नहीं बचा था इसलिए वह कांग्रेस में आ गए।’
हरीश रावत ने अपने पोस्ट में हरक सिंह रावत और भगत सिंह कोशियारी की मुलाकात को ‘गुपचुप’ व ‘रहस्यमय’ बताते हुए लिखा कि हरक सिंह एक ऐसे नेता से मुलाकात करने गए, जिसे महाराष्ट्र में लोकतंत्र की हत्या का साझेदार माना जा रहा है। ऐसी खबरों को चिंताजनक बताते हुए रावत ने यह भी कटाक्ष किया कि कांग्रेस पार्टी को सच बताने के लिए ऐसे समाचारों का खंडन करना चाहिए। यह कटाक्ष इसलिए है क्योंकि खुद हरक हरिद्वार में मीडिया से कह चुके हैं कि वह कोश्यारी से मिलने गए थे।
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