@शब्द दूत ब्यूरो (06 जुलाई, 2022)
किसी ने ठीक ही कहा है कि प्रतिभा किसी की मोहताज नहीं होती। प्रतिभा के लिए ना तो किसी डिग्री की जरुरत होती है और ना ही उम्र की। इन्हीं बातों को चरितार्थ कर दिखाया है कपकोट के दूरस्थ और दुर्गम गांव में रहने वाले 12 साल के हरीश कोरंगा ने। डिजिटल तकनीक के इस दौर में भी हरीश का गांव फोन नेटवर्क कवरेज से बाहर है। सीमित संसाधनों में जिंदगी गुजर-बसर कर रहे हरीश को बचपन से ही जो हाथ लगे उसी से जोड़-तोड़ करके तकनीक सीखने की आदत है। जब भी घर वाले उसे खिलौने दिलाते हैं, वह उसकी तकनीक को जानने के लिए उत्सुक रहता है।
हरीश के पिता कुंदन कोरंगा जेसीबी ऑपरेटर हैं। हरीश कई बार पिता के साथ जेसीबी देखने गया और अपनी जिज्ञासा से जेसीबी की तकनीकी पर काम किया। इसके बाद कुछ ही समय में उसने घरेलू सामग्री, बेकार मेडिकल इंजेक्शन, कॉपियों के गत्ते, पेटी, आइसक्रीम की डंडियों से हाइड्रोलिक पद्धति पर आधारित ऐसी जेसीबी मशीन बना दी कि देखने वाला हर व्यक्ति दांतों तले उंगलिया दबाने को विवश हो गया।
इधर हरीश के जेसीबी का वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर भी काफ़ी वायरल हो रहा है। हरीश ने बताया कि वह बचपन से ही तकनीकी में रूचि रखता है। पिता को जेसीबी चलाता देख जेसीबी में उसकी भी दिलचस्पी बढ़ी। वह बताता है कि घरेलू सामग्री की मदद से ही उसने हाइड्रोलिक ट्रिक पर वैसी ही जेसीबी बनाने की कल्पना की. हरीश बताता है कि इस दौरान उसकी कोशिशें कई बार फेल भी हुई, लेकिन उसने हार नहीं मानी और लगातार कोशिशों के बाद उसने आखिरकार यह जेसीबी बना ही ली।
हरीश की विशेषता जेसीबी तक ही सीमित नहीं है। इससे पहले वह हेलीकॉप्टर बनाकर उड़ा चुका है और अन्य तकनीकी खिलौने बना चुका है। पहाड़ में होनहारों की कमी नहीं है, बस जरूरत है तो प्रतिभा को निखारकर नए मंच पर लाने की।
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