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उत्तराखंड :द्वाराहाट का कुमाऊँ इन्जीनियरिंग कॉलेज, मुख्यमंत्रियों की नाकामियों का स्मारक

@हीरा सिंह अधिकारी(19 जून 2022)

लेखक हीरा सिंह अधिकारी उत्तराखंड के तमाम मुद्दों पर समय-समय पर अपनी चिंता से अवगत कराते रहते हैं। प्रस्तुत लेख में वह राज्य के तकनीकी शिक्षा की बेहाली पर अपने बेबाक विचार रख रहे हैं। 

शिक्षण संस्थानों को जब राजनेताओें की छत्रछाया में रख दिया जाता है तो उनकी हालत द्वाराहाट के कुमाऊँ इन्जीनियरिंग कॉलेज जैसी हो जाती है। आज कुमाऊँ इन्जीनियरिंग कॉलेज की वो हालत हो चुकी है जो ICU में अपने अंतिम दिन गिन रहे मरीज़ की होती है। यहाँ पढ़ाए जा रहे ट्रेडों की शैक्षिक गुणवत्ता में आई कमी के कारण छात्रों और कैम्पस इन्टरव्यू के लिए आनेवाली कंपनियों की संख्या में निरंतर घटती जा रही है।

कॉलेज में पढ़ाए जानेवाले अधिकांश ट्रेड या तो बंद हो चुके हैं या फिर बंद होने के कगार पर है। हालात ये हो चुके हैं कि जिस इन्जीनियरिंग कॉलेज पर द्वाराहाट को कभी गर्व होता था आज उसी इंजिनियरिंग कॉलेज पर शर्म आती है । आज कॉलेज की इस दयनीय स्थिति के लिए सूबे के मुख्यमंत्री सीधे तौर पर ज़िम्मेवार रहे हैं क्योंकि अधिकांश सरकारों में मुख्यमंत्री जी ही तकनीकी शिक्षा मंत्री रहे हैं जिनकी देखरेख में इस कॉलेज की दुर्दशा हुई ।

इस कॉलेज की नींव क्षेत्र के कृषकों की कृषि योग्य भूमि पर क़ब्ज़ा करके डाली गई। आज कॉलेज प्रशासन के पास कॉलेज में दी जा रही शिक्षा को गुणवत्तापरक बनाने का समय नहीं है। लेकिन भूमि अध्याप्त परिवारों के विरूद्ध सुप्रीम कोर्ट में केस लड़ने का भरपूर समय है और वो भी नैनीताल हाईकोर्ट में कई बार हारने के बावजूद। अधिकांश समय देहरादून प्रवास में रहनेवाले कॉलेज के उच्च प्रशासनिक अधिकारियों के पास विभाग के आला अधिकारियों की चरण वंदना करने का समय है। लेकिन अपने कर्मचारियों की शिकायतों के निदान का समय नहीं है। जिसके कारण प्रत्येक विभाग के कर्मचारियों के भीतर पनपा भयंकर असंतोष हड़तालों की सूरत समय- समय पर बाहर निकलता रहता है । आज कुमाऊँ इन्जीनियरिंग कॉलेज शिक्षा के लिए कम अपने छात्रों और अपने कर्मचारियों के भविष्य को बिगाड़ने के लिए अधिक पहचाना जाता है ।

मैं पहले भी लिखता रहा हूँ कि कुमाऊँ इन्जीनियरिंग कॉलेज का ग्राउंड अब VIP नेताओं के हैलिकॉप्टरों के उतरने और इसके अतिथि गृह के VIP कमरे नेताओं के रात्रि विश्राम के लिए रह गये हैं। पिछले बाइस वर्षों में यहाँ दर्जनों नेता आये होंगे लेकिन किसी ने इन्जीनियरिंग कॉलेज में छात्रों और शैक्षिक ट्रेडों की गिरती संख्या पर चिन्ता नही जताई होगी। अगर किसी एक ने भी सदन के अन्दर या सदन के बाहर चिन्ता व्यक्त की हो तो मुझे दुरूस्त करवा दीजियेगा ।

स्थानीय नेताओं के लिए कुमाऊँ इन्जीनियरिंग कॉलेज सोने का अंडा देनेवाली वह मुर्गी रही है जिसे उन्होंने एक झटके में काटने का प्रयास किया है। मुझे यह कहने में जरा भी तकल्लुफ़ नहीं होता है कि इस कॉलेज की ईंटों को उखाड़कर विधायकों के नवनिर्मित घरों की नींवों में लगाया गया है ।

आज कुमाऊँ इन्जीनियरिंग कॉलेज बंद होने के कगार पर है, कोई ताज्जुब नहीं होना चाहिए अगर ये कल बंद हो जाए या इसे अन्यत्र शिफ़्ट कर दिया जाए क्योंकि चूसे हुए आम की गुठली फेंक ही दी जाती है । आज भी यह कॉलेज मुख्यमंत्री जी की छत्रछाया में है, देखते हैं उनकी छत्रछाया में ये शिक्षा- वृक्ष पनपता है या पूर्ण रूप से सूख जाता है , सूख जाता है तो कोई बात नहीं अगर पनप जाता है तो थोड़ा आश्चर्य इस बात पर होगा कि उत्तराखंड में कोई मुख्यमंत्री संवेदनशील भी हो सकता है ।

 

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