@शब्द दूत ब्यूरो (04 जून, 2022)
चंपावत उपचुनाव में करारी हार से अब कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष करन माहरा और नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य के नेतृत्व पर सवाल उठने लगे हैं। हालांकि हार तो अप्रत्याशित नहीं थी, लेकिन कांग्रेस के दयनीय प्रदर्शन ने कई गंभीर सवाल तो उठा ही दिए हैं। विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद कांग्रेस हाईकमान ने पार्टी में फेरबदल तो किया, लेकिन अब ऐसा लगने लगा है कि पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के लिए अगले पांच साल तक पार्टी को एकजुट रखना टेढ़ी खीर होगी।
हाईकमान ने माहरा को प्रदेश अध्यक्ष और तो यशपाल आर्य को नेता प्रतिपक्ष की जिम्मेदारी सौंपी। उम्मीद दी कि भविष्य में ये कांग्रेस में जान फूंकेंगे, लेकिन इन दोनों के नेतृत्व में उत्तराखंड के चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी को सबसे बड़ी हार झेलने को विवश होना पड़ा।
चंपावत उपचुनाव में पार्टी उम्मीदवार निर्मला गहतोड़ी का शुरू से अंत तक अकेले चुनाव प्रचार करना यह साबित करता है कि कांग्रेस के भीतर अंतर्कलह अभी बाकी है। निर्मला गहतोड़ी ने कांग्रेस संगठन और कांग्रेस नेतृत्व पर सवाल उठाए हैं। उन्होनें कहा कि कांग्रेस का कोई भी बड़ा नेता चंपावत में चुनाव प्रचार को नहीं आया। गहतोड़ी का कहना है कि पार्टी की ओर से उन्हें पूरी तरह से सहयोग ही नहीं मिला।
फिलहाल प्रदेश अध्यक्ष करन माहरा और नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य की परीक्षा का सिलसिला अब जल्द ही शुरू होने जा रहा है। क्योंकि चंपावत उपचुनाव के बाद अब निकाय, पंचायत चुनाव होने हैं। इनके ठीक बाद वर्ष 2024 में लोकसभा चुनाव भी होगा। ये तीनों चुनाव कांग्रेस के लिए काफी महत्वपूर्ण साबित होंगे।
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