@नई दिल्ली शब्द दूत ब्यूरो (15 मई, 2022)
पंजाब के कांग्रेसी नेता सुनील जाखड़ के बयान पर उत्तराखंड के दिग्गज कांग्रेसी हरीश रावत तिलमिला उठे हैं। उन्होंने कहा कि चुनाव के दौरान जाखड़ का जो व्यवहार रहा, उससे ज्यादा डैमेज उनके जाने से नहीं हुआ। रावत ने कहा कि पार्टी ने उन्हें विपक्षी दल नेता बनाया। फिर कांग्रेस के प्रधान रहे। इसके बाद कैंपेन कमेटी का चेयरमैन बनाया। पार्टी ने उन्हें इतना कुछ दिया।
हरीश रावत ने कहा कि अगर कांग्रेस का साधारण कार्यकर्ता भी पार्टी छोड़कर जाता है तो तकलीफ होती है। इस वक्त पार्टी के लिए परीक्षा का समय है। परीक्षा की घड़ी में छोड़कर नहीं जाना चाहिए। पंजाब को लेकर जो भी फैसले किए गए, उनमें भी सुनील जाखड़ शामिल थे।
सुनील जाखड़ ने कहा कि हरीश रावत को कैप्टन अमरिंदर सिंह को डिस्टेबलाइज करने के लिए भेजा गया था। यह तो विरोधियों का काम होता है। पंजाब और उत्तराखंड में कांग्रेस को सरकार बनने की उम्मीद थी। क्या हुआ? वहां के सीएम कैंडिडेट हरीश रावत का एक पैर पंजाब और दूसरा देहरादून में था। चुनाव के दिन तक।
जाखड़ ने कहा, हरीश रावत क्या सोच लेकर आए थे?। क्या उनकी मंशा थी कि हम तो डूबे सनम, तुमको भी ले डूबेंगे। अगर हरीश रावत हारे हैं तो यह भगवान का न्याय है। वह यही डिजर्व करते थे। कांग्रेस की बुरी हालत में रावत का बहुत बड़ा रोल है।
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