@शब्द दूत ब्यूरो (30 अप्रैल 2022)
मंदिर नहीं हटा तो रेलवे स्टेशन शिफ्ट करना पड़ सकता है।
आगरा में राजा की मंडी रेलवे स्टेशन क्षेत्र में बने मां चामुंडा देवी मंदिर को हटाने के नोटिस के खिलाफ हिंदूवादी संगठनों ने शुक्रवार को डीआरएम कार्यालय का घेराव किया। उन्होंने वहीं बैठकर हनुमान चालीसा का पाठ कर ज्ञापन दिया। इसके बाद डीआरएम ने इस मामले में बातचीत के लिए 15 लोगों को अंदर बुलाया।
क्या है पूरा मामला
आगरा में राजा की मंडी रेलवे स्टेशन क्षेत्र से चामुंडा देवी मंदिर को हटाने की नोटिस के खिलाफ पिछले कुछ दिनों से आंदोलन चल रहा है। मंदिर की ओर से महंत और उनके समर्थकों ने प्रशासन से साफ-साफ कर दिया है कि वे मंदिर को नहीं हटने देंगे। प्रशासन चाहे तो रेलवे स्टेशन को कहीं और ले जाए। विवाद के तूल पकड़ने के साथ ही इस मामले में स्थानीय सियासत भी गर्मा गई है। इस मामले में अब हिंदूवादी संगठनों ने आरपार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है। शुक्रवार को हिंदूवादी संगठन के कार्यकर्ताओं ने डीआरएम कार्यालय का घेराव कर दिया। कार्यकर्ताओं ने वहां हनुमान चालीसा का पाठ किया। उन्होंने कहा कि वे किसी भी कीमत पर मंदिर को शिफ्ट करने के लिए तैयार नहीं हैं। उन्होंने कहा कि यहां मंदिर का गर्भगृह स्थापित है। किसी भी स्थिति में इसे हटने नहीं दिया जाएगा। उन्होंने यहा तक कहा कि यदि रेलवे प्रशासन चाहे तो राजा मंडी स्टेशन को बिल्लौचपुरा शिफ्ट कर सकता है। राजा मंडी रेलवे स्टेशन पर बने मंदिर के पुजारी के मुताबिक, “यह मंदिर 250 से 300 साल पुराना है। मंदिर स्टेशन से पहले का है। साल 2000 से मैं खुद यहां पूजा कर रहा हूं, जबकि मुझसे पहले और लोग यह काम करते थे।”
मंदिर का इतिहास
इस मंदिर के इतिहास के बारे में कहा जाता है कि यह मंदिर ढाई सौ साल से भी ज्यादा पुराना है। यहां पर मां चामुण्डा की मूर्ति कैसे आयी किसी को नहीं पता। लोग बताते हैं कि मूर्ति अपने आप जमीन में से निकली थी। पास में ही डेढ़ सौ सालों से भी पुराना एक पीपल का पेड़ है उसी के ठीक बगल से रेलवे लाइन गुजरती है। जिसको लेकर आगरा रेलवे और मंदिर प्रशासन में पिछले कई सालों से विवाद चल रहा है। प्लेट फार्म की 72 मीटर जगह पर विवाद है। रेलवे ने मंदिर को तोड़ने के लिए 12 अप्रैल को नोटिस जारी किया था और 10 दिनों का समय दिया था। नोटिस के 10 दिन समाप्त भी हो गए हैं। लेकिन मंदिर को तोड़ने की हिम्मत अभी तक कोई भी नही जुटा पाया है।
रेलवे अधिकारियों का पक्ष
का उधर रेलवे के अधिकारी कहते हैं कि भारत सरकार की मंशा है कि ट्रेनों की स्पीड 150 किमी प्रति घंटे की रफ़्तार तक बढ़ाई जाए, लेकिन राजा की मंडी स्टेशन पर अवैध निर्माण के चलते पटरी काफी वक्राकार है, जिस वजह से ट्रेन की अधिकतम स्पीड 30 किमी प्रतिघंटा ही रहती है। आगरा-दिल्ली मार्ग पर ट्रेनों की गति में सुधार के लिए छह करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। अगर अवैध निर्माण हट जाता है तो इस ट्रैक पर ट्रेन 150 किमी प्रतिघंटे की रफ़्तार से दौड़ सकती है। चामुंडा मंदिर के साथ ही अन्य अवैध बने धार्मिक स्थलों जैसे मस्जिद आदि को भी नोटिस जारी किया गया है। यह तकनीक से जुड़ा निर्णय है। यदि इस कार्य में अड़चन आती है तो यात्रियों की सुविधा को देखते हुए रेल प्रशासन द्वारा राजा की मंडी स्टेशन यात्रियों के प्रयोग के लिए बंद करने के लिए विचार करने पर बाध्य होगा। ’
बहरहाल यह मामला रेलवे प्रशासन के लिए गले की हड्डी बन गया है। हिंदू संगठनों के विरोध के चलते रेलवे अधिकारी कार्रवाई करने से बच रहे हैं।
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