आईएएस पंकज पांडे की पत्नी द्वारा वरिष्ठ महिला चिकित्सक से अभद्रता विवाद में उत्तराखंड में कोई नई बात नहीं है। इससे पहले पंकज पांडे गौतम बुद्ध सुभारती कॉलेज और उससे पूर्व करोड़ो के एन एच घोटाले में आरोपी रहे ।
अभद्रता के बाद अपने स्थानांतरण से दुखी होकर अपने इस्तीफे में डॉ. निधि उनियाल ने कहा वह एक क्वालीफाइड डॉक्टर हैं। वे देश के कई प्रतिष्ठित मेडिकल कॉलेजों में रह चुकी हैं। पहले तो सरकारी अस्पताल में मरीजों को छोड़कर किसी के घर पर जाकर देखना उनका कार्य नहीं है। इसके बावजूद वह अस्पताल प्रशासन के कहने पर सचिव की पत्नी को देखने उनके घर गईं। डॉ. निधि ने आरोप लगाया कि वहां उनके साथ अभद्र व्यवहार किया गया, जिसका विरोध करने पर उनका तबादला किया गया है।
@मनीष वर्मा (लेखक वॉयस आफ नेशन के संपादक हैं)
देहरादून। अभी हाल ही में राजस्थान में महिला चिकित्सक से अभद्रता और उसके बाद महिला चिकित्सक ही आत्महत्या का मामला ठंडा नहीं पड़ा था कि आज उत्तराखंड के आईएएस अधिकारी पंकज पांडे की पत्नी द्वारा वरिष्ठ महिला चिकित्सक निधि उनियाल से अभद्रता के बाद उनका स्थानांतरण विवाद सुर्खियों में है। इससे पहले गौतम बुद्ध सुभारती कॉलेज और उससे पूर्व करोड़ो के एन एच घोटाले में आरोपी रहे है यही नहीं इनके द्वारा सचिवालय में ” कुछ भी ” किया जा सकता है। जिसे बदलने की हिम्मत इनके प्रमुख सचिव एवं मुख्य सचिव तक में नही है। यही नहीं इनके खिलाफ DOPT , भारत सरकार से जो जांच आई उसे मुख्य सचिव लेटर लेटर गेम में खेल रहे है। कभी इन्हीं के विभाग से आख्या मांग ली जाती है। तो सतर्कता विभाग द्वारा इनकी अपर सचिव सोनिका मैडम से जांच करने को कहा जाता है भला कही सुना है आपने की सचिव की जांच अपर सचिव करे ? या पुलिस अधीक्षक की जांच कोई दरोगा कर सकता है ??

जी हां, जब अपने मुंह लगे अधिकारी को बचाना होता है तो ठीक इसी तरह का खेल उत्तराखंड सचिवालय में खेला जाता है। और यह प्रमाणिक इसलिए भीं है कि हमें खुद जानकारी लेने पर उत्तराखंड सतर्कता विभाग के अपर सचिव श्याम सिंह ने बताया कि पंकज पांडे की जांच की पत्रावली पहले इनके सेक्शन ऑफिसर को भेजी गई जब उन्होंने मना कर दिया तो इनकी जांच की पत्रावली अपर सचिव सोनिका को नियुक्त किया गया और उन्होंने दो टूक जवाब दे दिया कि मैं अपने सचिव के खिलाफ कैसे जांच करूं ।
साफ दिखता है की फाइल फाइल इधर उधर घुमाई जा रही है टाइम पास किया जा रहा है।
दूसरी तरह जो जांच पीएमओ से आई उसको पत्र लिख कर दून मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल को जांच समिति का अध्यक्ष बना कर भेज दिया गया है। और 2 महीने से वो पत्र और जांच कर रहे है। कभी स्थलीय निरीक्षण कर रहे है। तो कभी बैंको को पत्र लिख रहे है। पर अधिकारी को यह नही दिखता कि सबूत तो पत्रावली पर है। और खुद सुभारती वालो ने दाखिल किया है। अपनी बैलेंस शीट में और जब उसमे लोन स्पष्ट दिख रहा है तो अनिवार्यता प्रमाण पत्र झूठे शपथ पत्र देकर लेने का खुलासा तो स्वयं ही हो जा रहा है। क्योंकि सर्वविदित है कि सुभारती एमटीवीटी ट्रस्ट वालो ने राज्य सरकार को 72 करोड़ की देनदारी / पेनाल्टी देनी है। और पंकज पांडे ने 10 रुपए के शपथ पत्र लेकर उनकी गारंटी को जब व्यवस्था होगी तब देने को मान लिया। जबकि शपथ पत्र में यह लिखा है कि संस्था की कोई प्रॉपर्टी बंधक नही हैं और न बंधक करेंगे। जब तक की 72 करोड़ चुका नही देते पर बड़ा खुलासा तो ट्रस्ट द्वारा आवेदन के साथ दाखिल की गई बैलेंस शीट से स्वयं ही हो जा रहा है कि भूमि भवन पूर्व से ही बंधक है व करोड़ों रुपए लोन है ।
दूसरी बात जब इस संस्था ने पूर्व में 2016 से 2019 तक 300 एमबीबीएस के छात्रों का भविष्य बर्बाद कर दिया और उनके 2 साल खराब कर दिए और निदेशक ने इनको बैन किया हुआ था तो इनको चिकित्सा शिक्षा निदेशक और निरीक्षण कमेटी की अनुमति न देने की संस्तुति को इग्नोर करके प्रमाण पत्र जारी करने के पीछे क्या मंशा थी ? मतलब साफ दिखता है।
आज इस अधिकारी की पत्नी द्वारा द्वारा वरिष्ठ महिला चिकित्सक से अभद्रता किया जाना और बीवी को शिकायत पर इस महिला चिकित्सक को दंड स्वरूप अल्मोड़ा मेडिकल कॉलेज भेजने का तत्काल आदेश निकालना कहा की सभ्यता है ?
पहले भी तत्कालीन गवर्नर से मिलकर अपनी एन एच घोटाले की जांच समाप्त करवाना भी कहा का नियम है ? कालिदास रोड पर इतनी शानदार कोठी इतनी बड़ी संपत्ति पर किसकी बन रही है ?
ED,CBI को तत्काल जांच बैठानी चाहिए इन सब प्रकरणों पर और यहां से इलाहाबाद , दिल्ली,मुंबई ,बैंगलोर तक निगाह लगानी चाहिए ।
उम्मीद है निष्पक्ष और ईमानदार छवि वाले और दूसरी पारी शुरू करने वाले मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी इस पर विशेष ध्यान देंगे क्योंकि धन सिंह रावत से तो जनता का भरोसा उठ चुका है और बमुश्किल 267 वोट से जीत कर आए है। तो अपनी छवि को मजबूत करने हेतु कार्रवाई करनी होगी।
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