@शब्द दूत ब्यूरो (30 मार्च, 2022)
उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव हो चुके। राज्य का मुख्यमंत्री चुन लिया गया है और मंत्रिमंडल का गठन भी हो चुका। राज्य की राजनीति के कुछ जाने पहचाने चेहरे नेपथ्य में जाने की तैयारी में हैं तो कुछ चेहरे देश की राजनीति यानी 2024 में होने वाले लोकसभा चुनाव की तैयारियों में जुट गए हैं।
इधर, खबर है कि उत्तराखंड की राजनीतिक शतरंज में खेत रहे मोहरे पूर्व काबीना मंत्री हरक सिंह रावत अब नई बिसात बिछाने की तैयारी में हैं। विधानसभा चुनाव में उनकी पुत्रवधू अनुकृति गुसाईं की हार के बाद अब उनकी नजर 2024 के लोकसभा चुनाव पर है।
राजनीतिक लिहाज से हरक सिंह रावत के लिए बीते छह महीने बेहद उथल-पुथल भरे रहे। जाहिर है कि भाजपा छोड़कर कांग्रेस में आने और अपनी पुत्रवधू को टिकट दिलाने की कवायद के बहाने हरक सिंह रावत ने राजनीति के कुछ नए पाठ भी पढ़े होंगे। राजनीति के जानकार मानते हैं कि सियासी चर्चाओं के केंद्र में रहने वाला यह नेता ऐसे ही हार नहीं मानने वाला।
चुनाव परिणाम आने से पहले हरक सिंह रावत ने कहा था, अगर कांग्रेस को बहुमत नहीं मिलता तो उन्हें दोबारा राजनीति की एबीसी सीखनी पडेगी। हरक सिंह का यह बयान उनके मौजूदा हालातों से मेल खाता दिख रहा है। हालांकि हरक सिंह जैसा नेता पूरी तरह से धराशाई हो गया हो, ऐसा मानना भी शायद जल्दबाजी होगी। उनका अब लोकसभा चुनाव 2024 पर फोकस करना इस बात की तस्दीक करता है।
हरक सिंह ने अब लोकसभा चुनाव लड़ने की इच्छा जताई है और वह इसकी तैयारी में जुट गए बताए जा रहे हैं। लेकिन हरक सिंह रावत किस मैदान में ताल ठोकेंगे यह अभी साफ नहीं। बता दें कि वह एक बार पौड़ी गढ़वाल लोकसभा सीट पर चुनाव मैदान में ताल ठोक भी चुके हैं। हालांकि उस समय उन्हें हार मिली थी।
राजनीति के जानकारों की माने तो हरक सिंह रावत पौड़ी और हरिद्वार लोकसभा में खुद के लिए संभावनाएं तलाश रहे हैं। हालांकि उनका चुनाव लड़ना या नहीं लड़ना टिकट मिलने पर भी निर्भर करता है। कांग्रेस उन्हें लोकसभा चुनाव में उतारती है या नहीं यह उसके बाद ही साफ होगा।
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