@शब्द दूत ब्यूरो (25 मार्च 2022)
काशीपुर । यह शहर समाजसेवियों ,दान वीरों एवं परोपकारी लोगों की कर्मभूमि रहा है ।यही कारण है कि काशीपुर अपने आप में एक धार्मिक नगरी माना जाता है। यहां के लोग अत्यंत मिलनसार और एक दूसरे को स्नेह और सहयोग देने वाले माने जाते हैं ।यही कारण है कि यहां आकर रहने वाला हर शख्स यही का होकर रह जाता है।
काशीपुर के महादानी जिस तरह समाज सेवा एवं धर्म के कार्यों में बढ चढकर सेवा भाव दिखाते आए हैं उससे इस शहर की मान मर्यादा में और भी चार चांद लगते रहे हैं ,और यह कहावत और बलवती रही है कि कुछ साथ नहीं जाएगा। केवल हाथ का दिया दान और की गई सेवा ही साथ जाएगी। ऐसी ही समाज सेवा की सोच रखने वाले महादानियों में एक चर्चित नाम आता है जसपुर खुर्द निवासी स्वर्गीय बाबूराम प्रॉपर्टी डीलर का, जिन्होंने अपनी नेक नियत से कमाया भी खूब और दोनों हाथों से दान भी खूब किया। वह प्रतिवर्ष अनेक गरीब कन्याओं की शादी इतनी धूमधाम से कराते थे कि देखने वालों को लगता था जैसे वो खुद की बेटियों की शादी कर रहे हों ।
वह प्रॉपर्टी के कारोबार से जुड़े थे, मगर कभी छल और फरेब को उन्होंने पास नहीं फटकने दिया।हमेशा लोगों की सेवा और सहायता करने में विश्वास रखते थे ।काल के क्रूर हाथों ने कोरोना महामारी के चलते भले ही उन्हें हमसे छीन लिया मगर उनके किए गए सेवा भाव के काम आज भी उन्हें हमारे बीच जिंदा रखे हुए हैं , और यह शहर आज भी उनके परोपकारी व्यवहार को याद करता है। बाबूराम जिस सोच के धनी थे उसका प्रभाव उनके परिवार पर भी नजर आता है और उनके पुत्र भी पिता के समाजसेवी कार्यों को आगे बढ़ाने में विश्वास रखते हैं। उनके बड़े पुत्र आनंद कुमार एडवोकेट एक आदर्श ग्राम प्रधान रहे हैं तो दूसरा बेटा अनिल कुमार नगर निगम में पार्षद है। पूर्व ग्राम प्रधान आनंद कुमार कहते हैं कि वह अपने पिता के आदर्शों पर चलकर समाज सेवा को हमेशा आगे बढ़ाते रहेंगे और जनहित की लड़ाई में जहां भी समाज को उनकी आवश्यकता पड़ेगी उसमें वे सदैव अग्रिम पंक्ति में खड़े रह कर अपनी जिम्मेदारी का निर्वाह करेंगे। जहां तक गरीबों की सेवा का प्रश्न है वह भी हमेशा जारी रहेगी।
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