@शब्द दूत ब्यूरो (23 मार्च 2022)
नैनीताल। वर्ष 2019 में हरिद्वार लोकसभा से भाजपा के बागी प्रत्याशी रहे मनीष वर्मा की याचिका पर आज उत्तराखंड उच्च न्यायालय में सुनवाई होनी है।
बता दें कि 2019 लोस चुनाव में भाजपा के बागी प्रत्याशी मनीष वर्मा ने भाजपा नेता व पूर्व मुख्यमंत्री डॉ निशंक पर झूठा शपथ-पत्र दाखिल करने का आरोप लगाते हुये कहा था कि उन्होंने सरकारी देयता वाले कालम में यह बात छिपाई थी कि उन पर कोई सरकारी बकाया नहीं है। मनीष वर्मा ने इस आधार पर डॉ निशंक के चुनाव को निरस्त करने के लिए उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी। मनीष वर्मा ने याचिका में कहा कि माननीय उच्च न्यायालय उत्तराखंड ही रमेश पोखरियाल समेत अन्य पूर्व मुख्यमंत्रियों पर 3.5 करोड़ को भुगतान करने का आदेश दे चुका था। अत : रमेश पोखरियाल का शपथ पत्र झूठा होने के कारण उनका चुनाव निरस्त किया जाना चाहिए ।
मनीष वर्मा ने बताया कि मामले पर 2019 से सुनवाई चल रही है। इस बीच त्रिवेंद्र रावत सरकार उक्त पूर्व मुख्यमंत्रियों पर करोड़ों रुपए माफ करने का शासनादेश केबिनेट एवम विधान सभा में ले आई। और देयता माफ कर दी गई जिससे और पुख्ता प्रमाण हो गया कि रमेश पोखरियाल निशंक पर सरकारी देनदारी उस दिन देय थी ।
मनीष वर्मा ने सरकारी देनदारी माफ करने के शासन,कैबिनेट और विधान सभा में पारित एक्ट को पुनः उत्तराखंड उच्च न्यायालय में चुनौती दी। जिस पर माननीय उच्च न्यायालय नैनीताल ने उक्त शासन के आदेश ,केबिनेट और विधान सभा द्वारा एक्ट को निरस्त करते हुए तत्काल सरकारी देय जमा करवाने को निर्देशित किया । इसी बीच रमेश पोखरियाल निशंक पर माननीय न्यायालय का आदेश न मानने पर न्यायालय की अवमानना का केस भी रूलक द्वारा दायर किया गया। हालांकि इस मामले में डॉ निशंक ने सुप्रीम कोर्ट से स्टे लिया है ।
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