झाँसी। उत्तर प्रदेश संस्कृति विभाग के अंतर्गत राजकीय संग्रहालय , क्षेत्रीय पुरातत्व इकाई , सत्यार्थ साहित्यकार संस्थान एवं बुंदेलखंड कला संस्कृति समिति झाँसी के संयुक्त तत्वाधान में आजादी के अमृत महोत्सव के उपलक्ष में लोरी गीत कार्यशाला एवं गायन प्रतियोगिता का आयोजन हुआ।
राजकीय संग्रहालय में उत्तर प्रदेश सरकार के राज्य मंत्री हरगोविंद कुशवाहा के मुख्यआतिथ्य एवं उत्तर प्रदेश संगीत एवं नाटक अकादमी के उपाध्यक्ष डॉक्टर धन्नालाल गौतम , लोक भूषण पन्नालाल असर , कलार्पण के प्रांतीयमहामंत्री शिवतनय श्रीवास्तव , इतिहासकार डॉ चित्रगुप्त श्रीवास्तव , संगीतज्ञ समीर भालेराव एवं डा.नीति शास्त्री के विशिष्ट आतिथ्य में किया गया। इस अवसर पर लोक गायिका रंजना तिवारी एवं सुश्री कल्पना सिंह ने माताओं व छात्राओं को लोरी गायन का प्रशिक्षण दिया। रंजना तिवारी ने अपनी मखमली आवाज में लोरी गायन किया। कार्यशाला में गुरुकुल संगीत अकादमी के छात्र – छात्राओं ने विभिन्न प्रकार की लोरियां प्रस्तुत कीं। वहीं सरस्वती बालिका विद्या मंदिर इंटर कॉलेज की छात्राओं ने लोरी गायन कार्यशाला में भाग लिया। गुरुकुल संगीत अकादमी छात्राओं दिवाश्री , अभिप्रेरणा राय , तनुश्री गुप्ता व छात्र योगेश शिवहरे द्वारा गाई गईं लोरियों की सभी ने तारीफ की।
डॉ अशोक गोस्वामी की सरस्वती वंदना से कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ । राजकीय संग्रहालय के उपनिदेशक और इस आयोजन के प्रमुख आयोजक डॉ सुरेश कुमार दुबे ने लोरी कार्यशाला के औचित्य पर प्रकाश डाला। वहीं लोकभूषण पन्नालाल असर ने बुंदेली लोरियों का इतिहास, उनकी गायन की विधाएं , समय व राग आदि के विषय में अत्यंत गहन जानकारी दी। अपने मुख्य उद्बोधन में राज्य मंत्री हरगोविंद कुशवाहा ने लोरी गीतों की परंपरा के ऐतिहासिक महत्व का उल्लेख किया । डॉक्टर धन्नूलाल गौतम ने इस आयोजन की प्रशंसा करते हुए सभी से आग्रह किया कि लोरी जैसी विलुप्त हो रही विधा को जीवित बनाये रखने के लिए ऐसे आयोजनों का बहुत महत्व है। वहीं इतिहासकार डॉ चित्रगुप्त श्रीवास्तव ने लोरी को विश्वविद्यालय स्तर तक पाठ्यक्रम एवं छात्राओं के बीच लाए जाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
समारोह के आयोजक सत्यार्थ साहित्यकार संस्थान के केन्द्रीय अध्यक्ष श्याम शरण नायक सत्य ने मंचासीन अतिथियों व सभागार में उपस्थित विद्वानों को अंगवस्त्र व स्मृति चिह्न भेंटकर स्वागत किया। इस अवसर फिल्म अभिनेता आरिफ शहडोली व प्राचार्य हरिमोहन तिवारी , संगीता निगम , वंदना रावत , कविता , संजय श्रीवास्तव , कृष्ण मुरारी श्रीवास्तव सखा , निहाल चंद्र शिवहरे , साकेत सुमन चतुर्वेदी , आलोक शाण्डिल्य , राजीव त्रिपाठी , डा. सुखराम चतुर्वेदी , ए.के.सिंह , जे.पी.विश्वकर्मा , हरनारायण सविता , कामिनी वघेल , सुदर्शन शिवहरे , मनमोहन मनु , मोहन नेपाली सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
आयोजन समिति से जुड़े वरिष्ठ प्रवक्ता संजीव त्रिपाठी व कलार्पण के मण्डल संयोजक प्रदीप कुमार पाण्डेय ने
मंचासीन अतिथियों को पुष्पहार भेंट किए।
इस ऐतिहासिक महत्व के समारोह का संचालन डा. रामशंकर भारती ने किया।
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