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बुंदेली लोकसंस्कृति को समर्पित पार्श्वगायिका लता सिंह के साथ डा रामशंकर भारती की बातचीत 

बुंदेलखण्ड की रसभरी माटी उरई में जन्मी और वर्तमान में माया नगरी मुंबई में स्थापित हो चुकीं लता सिंह अपनी लोक गायन शैली के द्वारा बुंदेली लोकसंस्कृति का परचम पुरी दुनिया में फैलाने में लगीं हैं। बुंदेलखण्ड की एकमात्र अंर्तराष्ट्रीय वेबसाइट व संस्था ” बुंदेली झलक ” (मुंबई ) के संस्थापक – फिल्म निर्देशक गौरीशंकर रंजन के सौजन्य से चलाई जा रही फेसबुक लाइव श्रंखला में ‘बुंदेलखण्ड में वसंत ‘ के एक एपीसोड में लता सिंह की सधी और मँजी हुई गायकी ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।

उन्होंने बुंदेलखण्ड की लुप्त हो रहीं अनेक पारंपरिक गायन शैलियों दादरी , गारी , लेद , अचरी तथा फाग जैसी शुद्ध बुंदेली लोकगीतों को अपनी मखमली आवाज में एक से बढ़कर प्रस्तुतियाँ दीं। उनके साथ हरमोनियम पर प्रसिद्ध संगीत गुरु ” निषाद संगीत अकादमी ” की निदेशक श्रीमती कालिंदी रंजन ने संगत की वहीं तबले पर क्रिस ने साथ दिया।
इस मौके पर उनकी संगीत यात्रा के विषय में उनसे की गयी बातचीत के कुछ अंश यहाँ प्रस्तुत हैं –
● बुंदेलखंड को लेकर आप क्या सोचती हैं ?
★ बुंदेली मिट्टी की लोक कलाओं , संस्कृति व साहित्य को
आमजन तक पहुँचाना ही अब मेरा सपना है। यही मिशन लेकर मैं अब काम कर रही हूँ..।
● अपनी शिक्षा – दीक्षा के विषय में कुछ बताइए ?
★ मेरी ग्रेजुएशन तक की शिक्षा अपनी जन्मभूमि उरई में
ही हुई और फिर मैंने एमए संगीत विषय लेकर राजस्थान
विश्विद्यालय से सन् 96 से 98 तक किया। वहाँ का संगीत
भी समझा । फिर प्रयाग संगीत समिति से प्रभाकर व शास्त्रीय संगीत अलग से सीखा।
● आपने संगीत के अलावा क्या दूसरी गतिविधियों में भी भाग लिया है ?
.★ हाँ , मैं संगीत कार्यक्रमों के अतिरिक्त छात्र राजनीति में
भी सक्रिय रही और महिला सशक्तिकरण के लिए जमकर
काम किया, क्योंकि हमारा क्षेत्र अत्यंत रुढ़िवादी था ।
.● आपने अपनी शादी कब और किससे की ?
★ सन् 98 में एनएसडी के छात्र रहे और अबके प्रसिद्ध फिल्म निर्देशक नारायण सिंह चौहान से की। वह हमारे बुंदेलखंड के ही ललितपुर से हैं। विवाह के एक साल बाद
तो दिल्ली में और फिर मुम्बई आ गयी।
.● दिल्ली में संगीत के लिए क्या कुछ काम किया ?
.★ बिलकुल। दिल्ली में कत्थक केंद्र से जुड़कर ताज ताजमहोत्सव, नाट्याँजलि मुदराई आदि स्थानों में
भागीदारी का अवसर मिला।
● मुम्बई में क्या कर पा रही हैं ?
.★ पन्द्रह वर्ष तो मैं ज्यादातर विदेश में ही अपने प्रोग्राम
परफॉर्म करती रही। वैसे मैंने फिल्म काजी हाउस में गीत
गीत गाया, कुछ राजस्थानी व भोजपुरी फिल्मों में भी मेरे
गाए हुए गाने हैं।
● ऐसा माना जाता है कि संगीत गुरु परंपरा से सीखा जाता है । संगीत में आपके गुरु कौन हैं ?
.★ मैं सौभाग्यशालिनी हूँ कि मुझे प्रख्यात संगीत विदुषी डॉ वीणा श्रीवास्तव , राजेश निंरजन जी के अतिरिक्त देश के नामचीन उस्ताद मुहम्मद हुसैन – अहमद हुसैन तथा लोकप्रिय पार्श्व गायक सुरेश वाडेकर जी से संगीत सीखने का सौभाग्य मिला। वहीं विनय पाठक जी से भी शास्त्रीय गायन सीखा ।
● आपकी प्रिय गायक / गायिका कौन हैं ?
.★ मुझे आदरणीया आशा भोंसले जी और गज़ल में
मेहंदी हसन साहब बहुत पसंद हैं।
● आपने किन किन देशों में गायन किया है ?
★ मैं चीन , कनाडा , हाँगकाँग दुबई , कतर आदि देशों में अपने प्रोग्राम करती रही हूँ।
● अब आपका क्या लक्ष्य है ?
.★ बस अब अपने बुंदेलखंड की लोकसंस्कृति , लोकसंगीत
एवं लोक कलाओं को जन – जन तक पहुँचाना ही मेरा सपना है। मैं इसी क्षेत्र में पूरी तरह से लगी हूँ..।

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